CG : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, किसानों को मिलेगी बड़ी सौगात    |    नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में भाजपा नेता की बेटी समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता    |    बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री साय    |    लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |

राजधानी रायपुर के कई इलाको में मलेरिया, डेंगू का खतरा बढ़ा

राजधानी रायपुर के कई इलाको में मलेरिया, डेंगू का खतरा बढ़ा
Share

रायपुर, राजधानी रायपुर के कई इलाकों में जहां इन दिनों मलेरिया व डेंगू के मरीज बढ़ रहे है, वहीं उन इलाको के अलावा कई और एसे इलाके भी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है जहां जाम पड़ी नाली-नालो के साथ खाली प्लाटो में गंदगी व बारिश के पानी से भराव की स्थिति है।
राजधानी रायपुर में इन दिनों जोन-7 अंतर्गत रामनगर, भरतनगर, लक्ष्मणनगर, कर्मा चौक, छोटा-बड़ा रामनगर इलाके में डेंगू संक्रमण के मामले सामने आये है। सर्वाधिक मामले रामनगर में मिले है। इसके अलावा शहर के अन्य कई मोहल्लों में भी मलेरिया के मामले भी सामने आ रहे है। हालांकि मलेरिया से संक्रमित लोग ज्यादातर निजी अस्पतालों में इलाज कराना पसंद करते है जिसके चलते मरीजों के आकड़े की जानकारी नहीं मिल पायी है।
कोरोना काल में एक ओर जहां लोग पहले से ही कोविड-19 की पहली और दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर से बचने के लिए प्रयासरत है है, वहीं दूसरी ओर राजधानी रायपुर में अब डेंगू व मलेरिया की चपेट में आ रहे है, जिसकी सबसे बड़ी वजह जाम पड़े नाले-नालियां एवं गंदगी है। शहर के कई इलाकों में नगर निगम का साफ-सफाई अभियान सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गई है। जबकि जमीनी हकीकत में शहर के वीवीआईपी, वीआईपी और रिहायशी कालोनियों में ही नियमित रूप से सफाई अभियान चलाया जाता है, वहीं निचली बस्तियों व मोहल्लों में सफाई अभियान का काम 50 प्रतिशत भी नहीं किया जा रहा है परिणाम स्वरूप बस्तियों व मोहल्लों में बारिश के दिनों में अक्सर लोगों को विभिन्न बीमारियों की चपेट में आते है। हालांकि बीमारियो का कारण जाम पड़े नाली-नाले नहीं है, बल्कि खाली पड़े प्लाट भी है, जहां कचरों का ढेर के साथ बारिश का भरा पानी विभिन्न बीमारियों को आमंत्रित कर रहा है। शहर के अमलीडीह और महावीर नगर सहित शहर के कई मोहल्लों, कालोनियों में लोगों ने प्लाट खरीद कर खाली छोड़ दिए है। इन प्लाटो पर कचरो का ढेर के साथ बारिश का पानी भर गया है। ऐसे में इन प्लाटों में फैली गंदगी के कारण भी मच्छरों का प्रकोप के साथ मलेरिया व डेंगू का खतरा भी मंडरा रहा है।
 



Share

Leave a Reply