नहीं किया ट्यूशन फीस परिभाषित, पुनः पालक जाएंगे न्यायालय
रायपुर। मा. उच्चत्तम न्यायालय और उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट आदेश दिया है कि प्रायवेट विद्यालय ट्यूशन फीस ले सकते है और पालकों को सिर्फ ट्यूशन फीस ही देना है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और शिक्षा मंत्री प्रेम साय सिंह टेकाम से आग्रह किया था कि ट्यूशन फीस को परिभाषित किया जाए, क्योंकि ट्यूशन फीस को लेकर प्रदेश में भ्रांतिया है और ट्यूशन फीस के नाम पर कई प्रायवेट विद्यालयों के द्वारा मनमानी फीस ली जा रही है, जिसके पश्चात् मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्कूल शिक्षा विभाग को 26 अगस्त 2020 को पत्र लिखकर ट्यूशन फीस को परिभाषित करने का निर्देश दिया था, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव एआर खान ने 27 अक्टूबर 2020 को लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र लिखकर ट्यूशन फीस को परिभाषित करने का निर्देश दिया था, जिस पर कोई विचार नहीं किया गया, जिसके पश्चात् पुनः छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन ने 26 फरवरी 2021 को जितेन्द्र शुक्ला संचालक को पत्र लिखकर यथाशीघ्र ट्यूशन फीस को परिभाषित करने का आग्रह किया, लेकिन इस पर आज तक कोई विचार नहीं किया गया, अब हम इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन पुनः उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर कर ट्यूशन फीस को परिभाषित करने की मांग करने जा रहे है, क्योंकि ट्यूशन फीस की परिभाषा नहीं होने के कारण हर व्यक्ति इसे अपने अनुसार परिभाषित कर रहा है। प्रायवेट विद्यालयों के द्वारा पालकों से ट्यूशन फीस के नाम से मोटी रकम वसूली जा रही है, जिससे पालक अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि राज्य सरकार, स्कूल शिक्षा और लोक शिक्षण संचालनालय के द्वारा ट्यूशन फीस को परिभाषित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया, अन्यथा आज प्रायवेट विद्यालयों और पालकों के बीच लगातार टकराव की स्थिति निर्मित नहीं हो रही होती और हमें आज अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे होते, लेकिन सरकार पालकों की हित नहीं चाहती। सरकार को सिर्फ प्रायवेट विद्यालयों की चिंता है, इसलिए हमें अपनी लड़ाई स्वयं लड़नी पड़ेगी और अपने अधिकार और अपने बच्चों के जीवन व भविष्य की चिंता स्वयं करनी पड़ेगी। हम मा. उच्चत्तम न्यायालय और उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए ट्यूशन फीस देने को तैयार है, लेकिन ट्यूशन फीस को परिभाषित किया जाना चाहिए, जिसके लिए हम न्यायालय की शरण में जायेंगे।




