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बायोमीट्रिक फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग कर खातों से उड़ा रहे थे पैसे, पुलिस ने 2 को किया गिरफ्तार

बायोमीट्रिक फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग कर खातों से उड़ा रहे थे पैसे, पुलिस ने 2 को किया गिरफ्तार
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लखनऊ । बायोमीट्रिक फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग कर खाते में सेंध लगाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भारत सरकार की भूलेख वेबसाइट से आधार कार्ड व अंगूठे का निशान चोरी कर खातों से रुपये निकालने वाले दो युवकों को साइबर क्राइम सेल की टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपी आधार कार्ड से लिंक किसी भी बैंक खाते से रुपये पार कर देते थे। जेसीपी क्राइम नीलाब्जा चौधरी के मुताबिक आरोपितों ने सैकड़ों लोगों के खातों से लाखों रुपये निकाले हैं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
जेसीपी क्राइम नीलाब्जा चौधरी ने बताया कि कृष्णानगर निवासी एक व्यक्ति के खाते से 50 हजार रुपये निकाले थे। पीडि़त के पास न तो कोई वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) आया था और न ही उसने खाते की जानकारी किसी से साझा की थी। पीडि़त ने साइबर सेल में इसकी शिकायत की, जिसके बाद मामले की जांच साइबर सेल टीम को दी गई। टीम ने जब छानबीन की तो सबसे सुरक्षित माने जाने वाले बायोमीट्रिक डाटा की क्लोनिंग का मामला उजागर हुआ। इसके बाद पुलिस टीम ने वाराणसी से मूलरूप से आजमगढ़ के ताहिरपुर, सरूपहां देवगांव निवासी देवेंद्र कुमार मौर्या और अमरौना चंडवक जौनपुर निवासी रमेश कुमार को गिरफ्तार किया।


आधार से संबंधित कंपनी में करता था काम
देवेंद्र ने बताया कि वह पेईनर कंपनी में काम करता है। यह कंपनी एईपीएस (आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम) सर्विस देती है। आरोपियों के पास कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर आईडी पासवर्ड है। इसके माध्यम से वह किसी को भी आधार से रुपये निकालने वाली सेवा के लिए पासवर्ड उपलब्ध करा देते हैं। वह किसी के भी आधार कार्ड व उसके फिंगर प्रिंट के माध्यम से रुपये निकाल सकता है।


रुपये निकालने का तरीका जानने के बाद शुरू किया खेल
छानबीन में सामने आया कि देवेंद्र ने आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के तहत रकम निकासी की प्रक्रिया जानने के बाद अपने साथी रमेश के साथ फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया। आरोपियों को पता चला कि आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट से वह किसी के भी खाते से रुपये निकाल सकते हैं। इसके लिए संबंधित का खाता आधार से लिंक होना चाहिए। इसके बाद आरोपियों ने भूलेख वेबसाइट पर अपलोड बैनामा धारकों का आधार कार्ड व फिंगर प्रिंट डाउनलोड कर लिये। इसके बाद थर्मल स्कैनर, बटर पेपर, इमेज बूस्टर व थिनर लिक्विड की मदद से भूलेख पर उपलब्ध फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग कर लेते थे। इसका इस्तेमाल बायोमीट्रिक मशीन पर लगाकर आधार कार्ड नंबर डालते थे और लोगों के खातों से रकम पार कर देते थे।


 सुरक्षा में सेंध से खलबली
सबसे सुरक्षित माने जाने वाले बायोमीटिक सिस्टम में सेंधमारी उजागर होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में खलबली मची हुई है। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर से लेकर कई अधिकारियों ने दोनों आरोपियों से लंबी पूछताछ की है। विभिन्न वेबसाइट पर उपलब्ध बायोमीट्रिक डाटा की क्लोनिंग की जानकारी उच्चाधिकारियों ने राज्य व केंद्र सरकार को दे दी है। यही नहीं, वेबसाइट की देखरेख करने वाली कंपनियों को भी इससे अवगत कराया गया है। पुलिस संबंधित विभाग को खामियां दूर करने के लिए पत्र लिखेगी। आरोपियों के पास से क्लोन किए गए फिंगर प्रिंट के सैंपल भी बरामद किए गए हैं।


 रिटायर्ड दरोगा का बेटा है कंपनी का कर्मचारी
आरोपी देवेंद्र कुमार मौर्या के पिता पुलिस विभाग में तैनात थे और सब इंस्पेक्टर के पद से रिटायर्ड हुए हैं। देवेंद्र ने बताया कि जिस कंपनी में वह काम करता है, उसमें कुछ कर्मचारियों ने इसी तरह से फ्रॉड किया था, लेकिन वह पकड़े नहीं गए थे। मामले का खुलासा होने पर उन कर्मचारियों के फ्रॉड के पैसों को जुर्माने के रूप में उससे वसूला गया था। करीब उसने चार लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना भरा था। इसी की भरपाई के लिए उसने भी यह काम शुरू कर दिया था।


 ऐसे तैयार करते थे फिंगर प्रिंट
आरोपी के अनुसार वह भारत सरकार की भूलेख वेबसाइट से आधार कार्ड व अंगूठे का निशान चोरी कर लेता था। इसके बाद स्कैनर के जरिए बटर पेपर पर अंगूठे के निशान को स्कैन कर लेता था और फिर बटर पेपर पर आई छाप को केमिकल (बरामद लिक्विड) के जरिए रबड़ नुमा अंगूठा तैयार कर लेता था। उसके बाद आधार कार्ड से कौन से अकाउंट नंबर लिंक है, इसकी जानकारी कर उस अंगूठे से अकाउंट से पैसा आधार इनेबल्ड पेमेंट के जरिए अलग-अलग वॉलेट में ट्रांसफर कर देते थे। इसके बाद उन्हें दूर दराज के केंद्र में पासवर्ड के जरिए कैश कर लेता था।
 


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