महापौर चुनाव में कांग्रेस कर रही सत्ता व प्रशासन का दुरुपयोग : उपासने
कोरबा | भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने कांग्रेस पर सत्ता व प्रशासन का दुरुपयोग कर महापौर चुनाव में देरी किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनादेश भाजपा के पक्ष में होने से कांग्रेस में निराशा व हताशा व्याप्त हो गया और अनाप-शनाप बयानबाजी की जा रही है।
निकाय चुनाव की मतगणना हुए एक सप्ताह बीत चुका है, पर निर्वाचन आयोग ने नगर निगम में महापौर-सभापति चुनाव तथा पार्षदों को शपथ ग्रहण कराने की तिथि अभी तक घोषित नहीं की है। नियमत: परिणाम आने के 15 दिवस के भीतर शपथ ग्रहण कराना है और इसके लिए सात दिन पहले सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को सूचना दिया जाना है। एक सप्ताह बीतने के बाद अब आठ दिन का वक्त ही शेष रह गया है। विलंब होने से राजनीतिक पार्टी तथा पार्षदों में खलबली मची हुई है। वहीं आमजनों की नजर भी लगी हुई है कि आखिर निगम में कौन महापौर होगा तथा किसकी सरकार बनेगी। निर्वाचन आयोग की ओर से तिथि निर्धारित नहीं करने से राजनीतिक दल भी आगबबूला हो कर आरोप लगाने लगे हैं। सोमवार को भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने ने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस के पास संख्या बल है और जिला चुनाव अधिकारी निष्पक्ष रूप से कांग्रेस शासन के इशारे बिना प्रभावित हुए काम कर रहे हैं तो तत्काल महापौर के चयन हेतु अधिसूचना जारी करे। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास 31 पार्षद हैं और पार्टी इस कुनबे को संगठित रखने और बहुमत के लिए आवश्यक संख्या बल की व्यवस्था करने में सफ ल रही है। नगर निगम में पार्टी अपना बहुमत भी साबित करेगी। बैठक में विधायक ननकीराम कंवर, जिला भाजपा अध्यक्ष अशोक चावलानी, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष बनवारी लाल अग्रवाल, पूर्व संसदीय सचिव लखनलाल देवांगन, पूर्व महापौर जोगेश लांबा, विकास महतो, राजेंद्र अग्रवाल, महिला मोर्चा अध्यक्ष मीना शर्मा, संजूदेवी राजपूत समेत कुछ नवनिर्वाचित पार्षद, मंडल अध्यक्ष व महामंत्री समेत अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सवन्नी ने कहा कि नगर निगम में सभी पार्षदों की जीत जिले के कार्यकर्ताओं की जीत है। इसमें केवल पार्षदों की मेहनत नहीं बल्कि भाजपा विचारधारा के प्रति विश्वास और कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम भी शामिल है। नगर निगम में महापौर तथा सभापति कौन होगा, इसका फैसला रायपुर में प्रदेश स्तर पर होने वाली बैठक में तय किया जाएगा। पैनल तैयार कर वरिष्ठ नेताओं के समक्ष रखा जाएगा, विचार मंथन के उपरांत नाम की घोषणा होगी, जो सर्वमान्य होगी।







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