BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |

कोविड के चलते 7.2 करोड़ से ज्यादा बच्चों के गरीब बनने का खतरा : विश्व बैंक

कोविड के चलते 7.2 करोड़ से ज्यादा बच्चों के गरीब बनने का खतरा : विश्व बैंक
Share

वाशिंगटन | विश्व बैंक ने कहा है कि कोविड-19 के कारण स्कूल बंद रहने से 7.2 करोड़ से ज्यादा बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई जिससे उनके गरीब होने का खतरा पैदा हो गया है। इसका मतलब है कि वे 10 साल की उम्र तक साधारण पढऩे लिखने का काम भी नहीं कर पाएंगे।

पढ़ें : राजकीय सम्मान के साथ वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजन का किया गया अंतिम संस्कार

 विश्व बैंक की 2 नई रिपोटरें में कहा गया है कि महामारी पढऩे-सीखने को लेकर वैश्विक संकट को बढ़ा रही है। विश्व बैंक ने सीखने, निवेश और नीतियों को लेकर एक नई सोच के साथ रूपरेखा तैयार की है।
 
 
महामारी निम्न और मध्यम आय वाले देशों में प्राथमिक स्कूल के बच्चों में सीखने की इस कमी को 53 प्रतिशत से 63 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। इसके साथ ही यह इस पीढ़ी के छात्रों को भविष्य में लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर खोने का खतरा पैदा करता है, जो वे अपने जीवन-काल में कमाते। यह राशि वैश्विक जीडीपी के लगभग 10 प्रतिशत के बराबर है।
 
 
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोविड-19 के चलते स्कूल बंद होने से अप्रैल-2010 में सबसे ज्यादा 1.6 अरब छात्र स्कूल से बाहर रहे और आज भी 70 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं। परिवार की आय में आई अभूतपूर्व वैश्विक आर्थिक कमी के नकारात्मक प्रभाव ने स्कूल छोडऩे वालों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है।
 
 
महामारी के चलते बड़े पैमाने पर शिक्षा प्रणालियों को ऑनलाइन जैसे नवाचारों को तेजी से लागू करने के लिए मजबूर किया गया है। लेकिन माता-पिता के सपोर्ट और घर के सीखने के वातावरण की गुणवत्ता में असमानता के कारण सीखने की असमानता भी बढ़ गई है।
 

Share

Leave a Reply