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स्कूलों में बेटियों को नही मिल पा रही है सेनेटरी नैपकिन,प्राचार्यों ने विभागीय अधिकारियों को लिखा पत्र...

स्कूलों में बेटियों को नही मिल पा रही है सेनेटरी नैपकिन,प्राचार्यों ने विभागीय अधिकारियों को लिखा पत्र...
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दुर्ग| सरकारी स्कूलों में लगाई गई सेनेटरी नैपकिन मशीन दम तोड़ते नजर आ रही है। मशीनें खराब होने के कारण बेटियों को सस्तेदर पर नैपकिन नहीं मिल पा रही है। जिले के 540 स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन मशीनें इंस्टॉल कराई गई थी। 125 हाई व हायर सेकंडरी स्कूलों में लगी सेनेटरी नैपकिन मशीनें खराब हो चुकी हैं, जिसके चलते छात्राओं की परेशानी बढ़ गई है। संबंधित स्कूल के प्राचार्यों ने खराब सेनेटरी मशीनों की मरम्मत की मांग को लेकर विभागीय अधिकारियों को पत्र भी लिखा है। इसके बाद भी स्थिति जस की तस है। समय पर पैड मशीन रिपेयरिंग नहीं होने के कारण छात्राओं को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


मंशा पर कंपनी फेर रहा पानी-
जिले के हाई व हायर सेकंडरी स्कूल की छात्राओं को सस्तेदर में सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की मंशा से स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन मशीन लगाई गई थी। महिला बाल विकास विभाग ने निजी कंपनी से अनुबंध कर स्कूलों में मशीनें लगाई थी। मशीन की वारंटी लगभग दो वर्ष है, लेकिन वारंटी परेड में ही मशीन जवाब देने लगी है। शिक्षा विभाग के अधिकारी मशीनों के संधारण की मांग को लेकर महिला बाल विकास विभाग के अफसरों को पत्र लिख चुके हैं। इसके बाद भी महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी खराब हो चुकी मशीनों को सुधरवाने संजीदा नहीं हैं।

मासिक धर्म में स्कूल आने से हिचकिचाती हैं छात्राएं-
सेनेटरी नैपकिन मशीन से छात्राएं दो रुपये डालकर नैपकिन प्राप्त कर सकती थीं। यहीं नहीं उपयोग किए गए नैपकिन को डिस्पोज करने की भी सुविधा दी गई थी। मासिक धर्म (पीरियड) के समय स्कूल नहीं आ पाने वाली छात्राओं के लिए यह योजना फायदेमंद है। लेकिन मशीन खराब होने के कारण छात्राओं को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्कूलों में छात्राओं की संख्या घटती जा रही है। छात्राएं स्कूल प्रबंधन से मशीन को सुधरवाने की मांग भी कर चुके हैं। इसके बाद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

धुल खा रही 50 हजार की मशीन-
जिले के 550 हाई व हायर सेकंडरी स्कूल में सेनेटरी नैपकिन मशीन लगाई गई थी। एक मशीन की कीमत लगभग 50 हजार रुपये है। महिला बाल विकास विभाग ने एक कंपनी के माध्यम से स्कूलों में सेनेटरी मशीन लगवाया था। मशीन में खराबी आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी लगातार महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर खराब हो चुके मशीनों को सुधारने की मांग कर रहे हैं। अधिकांश मशीनें कुछ माह चलने के बाद उसमें खराबी आना शुरू हो गई।

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