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शिक्षा और निजी क्षेत्र में आधार अब अनिवार्य नहीं – सुप्रीम कोर्ट

शिक्षा और निजी क्षेत्र में आधार अब अनिवार्य नहीं – सुप्रीम कोर्ट
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 नई दिल्ली : हाल ही में, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस निर्णय के अनुसार, अब कई क्षेत्रों में आधार कार्ड का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया गया है। उदाहरण के लिए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), और निजी कंपनियाँ अब आधार कार्ड की मांग नहीं कर सकती हैं। इसके अलावा, स्कूलों को भी छात्रों से आधार कार्ड की मांग करने की अनुमति नहीं दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड अब उम्र निर्धारित करने या पहचान स्थापित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं है। निजी कंपनियों को आधार कार्ड की मांग करने से रोका गया है, जिससे उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, आधार का बायोमीट्रिक डेटा केवल सुरक्षा मामलों में एजेंसियों द्वारा मांगा जा सकता है। आधार अधिनियम की धारा 57 को असंवैधानिक घोषित किया गया है, जिससे निजी कंपनियों द्वारा आधार कार्ड की अनिवार्यता समाप्त हो गई है। अब शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी आधार कार्ड की अनिवार्यता नहीं होगी, जिससे लोगों को सुविधाएँ प्राप्त करने में आसानी होगी।

इस फैसले का सीधा प्रभाव विभिन्न सरकारी योजनाओं पर पड़ेगा। कई योजनाएँ जैसे कि जन धन योजना, पीएम आवास योजना, और खाद्य सुरक्षा योजना में आधार कार्ड की अनिवार्यता थी। अब इन योजनाओं में बदलाव किया जाएगा ताकि लोग बिना आधार कार्ड के भी लाभ उठा सकें। शिक्षा क्षेत्र में भी यह निर्णय महत्वपूर्ण है। पहले कई स्कूलों ने छात्रों से आधार कार्ड की मांग की थी, जिससे कई बच्चे शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते थे। अब इस फैसले के बाद, स्कूलों को छात्रों से आधार कार्ड मांगने की अनुमति नहीं होगी, जिससे सभी बच्चों को समान अवसर मिलेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में निजता के अधिकार को भी महत्वपूर्ण माना है। न्यायालय ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने का अधिकार है। यह निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) के तहत आता है, जिसमें कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को उसके व्यक्तिगत जीवन में हस्तक्षेप से बचाया जाना चाहिए।

इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने का भी कार्य करेगा। इससे नागरिकों को अपने अधिकारों की सुरक्षा मिलेगी और उन्हें सरकारी एवं निजी सेवाओं का लाभ उठाने में कोई बाधा नहीं आएगी।


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