नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में भाजपा नेता की बेटी समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता    |    बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री साय    |    लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |

संविधान में इंडिया हटाकर देश का नाम भारत करने की मांग, सुको में याचिका पर सुनवाई स्थगित

संविधान में इंडिया हटाकर देश का नाम भारत करने की मांग, सुको में याचिका पर सुनवाई स्थगित
Share

नईदिल्ली। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में संशोधन कर इंडिया शब्द हटाकर देश का नाम भारत या हिन्दुस्तान रखने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई स्थगित हो गई है. मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े इस मामले पर सुनवाई करने वाले थे, लेकिन उनके अवकाश पर रहने के कारण मामले को स्थगित कर दिया गया| कोर्ट ने इसकी सुनवाई के लिए अगली तारीख भी नहीं दी है|
 
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन उस दिन प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे के उपलब्ध न होने से सुनवाई 2 जून तक के लिए टाल दी गई थी अब आज फिर सुनवाई टल गई|

दरअसल, दिल्ली के रहने वाले नमह नाम के शख्स ने अपनी याचिका में अदालत से मांग की है कि संविधान के अनुच्छेद 1 में संशोधन कर इंडिया शब्द हटा दिया जाए| अभी अनुच्छेद 1 कहता है कि भारत अर्थात इंडिया राज्यों का संघ होगा| याचिका में कहा गया है कि इसकी जगह संशोधन करके इंडिया शब्द हटा दिया जाए और भारत या हिन्दुस्तान कर दिया जाए|

याचिकाकर्ता का कहना है कि इंडिया शब्द गुलामी का प्रतीक लगता है| देश को मूल और प्रमाणिक नाम भारत से ही मान्यता दी जानी चाहिए| याचिका में दावा किया है कि यह संशोधन इस देश के नागरिकों की, औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति सुनिश्चित करेगा| याचिका में 1948 में संविधान सभा में संविधान के तत्कालीन मसौदे के अनुच्छेद 1 पर हुई चर्चा का हवाला दिया गया है और कहा गया है कि उस समय देश का नाम भारत या हिन्दुस्तान रखने की पुरजोर हिमायत की गई थी|

Share

Leave a Reply