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DRDO ने सिंगल क्रिस्टल ब्लेड टेक्नोलॉजी विकसित की, जाने क्या है इसकी उपयोगिता और अब तक कितने देशों के पास है ये तकनीक

DRDO ने सिंगल क्रिस्टल ब्लेड टेक्नोलॉजी विकसित की, जाने क्या है इसकी उपयोगिता और अब तक कितने देशों के पास है ये तकनीक
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रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) ने हाल ही में सिंगल क्रिस्टल ब्लेड प्रौद्योगिकी (Single Crystal Blade Technology) विकसित की है। DRDO ने इस तरह के 60 ब्लेड हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को दिए हैं। दुनिया के बहुत कम देशों के पास यह तकनीक है। वे देश यूके, अमेरिका, रूस और फ्रांस हैं।

सिंगल क्रिस्टल ब्लेड क्या है?
हेलीकॉप्टरों को चरम स्थितियों में संचालित करने के लिए शक्तिशाली और कॉम्पैक्ट एयरो इंजन की आवश्यकता होती है। इसके लिए, सिंगल क्रिस्टल ब्लेड आवश्यक हैं।
सिंगल क्रिस्टल ब्लेड निकल आधारित सुपर एलाय से बने होते हैं।यह एलाय उच्च तापमान में भी कार्य करने में सक्षम हैं।
हेलीकॉप्टर में तकनीक का इस्तेमाल किया जायेगा।
रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO)
रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) की स्थापना 1958 में की गयी थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली के DRDO भवन में स्थित है। यह भारत सरकार की एजेंसी है। यह सैन्य अनुसन्धान तथा विकास से सम्बंधित कार्य करता है। DRDO का आदर्श वाक्य “बलस्य मूलं विज्ञानं” है। DRDO में 30,000 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। वर्तमान में DRDO के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी हैं। DRDO का नियंत्रण केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय के पास है। DRDO की 52 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क है। 


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