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रेलवे के इतिहास में दुर्ग-जगदलपुर एक्सप्रेस में तीन वर्ष से अधिक बंद रहने का एक नया रिकार्ड बनाया, जाने पूरी खबर

रेलवे के इतिहास में दुर्ग-जगदलपुर एक्सप्रेस में तीन वर्ष से अधिक बंद रहने का एक नया रिकार्ड बनाया, जाने पूरी खबर
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गदलपुर । छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से दुर्ग तक चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन नंबर-18211/18212 रेलवे के इतिहास में एक नया रिकार्ड जितने दिन चली नहीं उससे ज्यादा खड़ी रहने का बना रही है। कई नागरिकों ने राष्ट्रीय न्यूज सर्विस (आरएनएस) को बताया कि सप्ताह में तीन दिन चलने वाली दुर्ग-जगदलपुर एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन पिछले करीब एक साल से बंद है। इसे दुर्ग स्टेशन में पिट लाइन निर्माण कार्य के लिए अस्थाई रूप से बंद किया गया है। राष्ट्रीय न्यूज सर्विस (आरएनएस) को नागरिकों ने यह भी बताया कि दुर्ग से चलने वाली यही इकलौती यात्री ट्रेन है जिसे पिट लाइन निर्माण के लिए बंद किया गया है। रायपुर रेलमंडल के वरिष्ठ रेल अधिकारी भी नहीं बता पा रहे कि यह गाड़ी आगे चलेगी भी या नहीं। जगदलपुर से इस ट्रेन को पहली बार प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और केन्द्रीय मंत्री रहे डॉ चरणदास महंत ने 10 अक्टूबर 2012 को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। राष्ट्रीय न्यूज सर्विस (आरएनएस) को नागरिकों से मिली जानकारी के अनुसार जगदलपुर से कोरापुट होकर रायगढ़ा-महासमुंद के रास्ते रायपुर दुर्ग तक जाने वाली यह गाड़ी साढ़े छह सौ किलोमीटर का सफर करती थी। हरी झंडी दिखानें आए अतिथियों ने बस्तरवासियों को भरोसा दिलाया था कि इस गाड़ी को जो सप्ताह में तीन दिन चलती थी उसे नियमित किया जाएगा और इसकी समयसारिणी भी बदलवानें का प्रयास होगा पर रेलवे इस मामले पर भरोसे में खरे नहीं उतरे। पिछले सात सालों में यह गाड़ी करीब तीन साल से अधिक समय तक बंद रही है। वर्तमान में बंद चल रही है। अब तो यहां के लोग भी इस ट्रेन को भूलते जा रहे हैं। अब तो यह ट्रेन शुरू होने के बाद 1000 दिनों तक बंद रहने का रिकार्ड भी बना चुकी है। राष्ट्रीय न्यूज सर्विस (आरएनएस) को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उमाशंकर शुक्ल ने चर्चा के दौरान कहा कि यह बस्तर का दुर्भाग्य है। रेलवे द्वारा की जा रही बस्तर की उपेक्षा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि दोबारा रेलपटरी पर बैठकर आंदोलन करने का ही रास्ता बचा है।

 

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