आज भी अधूरी है 200 साल पुरानी इंचमपल्ली सिंचाई परियोजना, हजारों किसानों के लिए वरदान बनेगी यह परियोजना...
निर्माण पूरा हो जाए तो हजारों किसानों के लिए वरदान बनेगी यह परियोजना
बीजापुर-भोपालपट्नम के लिए वरदान साबित हो सकता है इंचमपल्ली बांध परियोजना
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल हिंसा प्रभावित बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम विकासखंड स्थित इंचमपल्ली बांध की संरचना 200 साल बीत जाने के बावजूद आज भी अधूरी है। बताया जाता है कि उसका निर्माण हैदराबाद के तत्कालीन निजाम द्वारा शुरू करवाया गया था। यह सिंचाई परियोजना जिला मुख्यालय बीजापुर से 77 किलोमीटर और विकासखंड मुख्यालय भोपालपट्टनम से करीब 27 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम दूधेड़ा के नजदीक गोदावरी नदी पर निर्मार्णाधीन है। हैदराबाद के निजाम की रियासत के समय इसका निर्माण शुरू हुआ था, जिसे प्लेग या हैजा फैलने के कारण अधूरा छोड़ दिया गया था।
अगर इसका निर्माण आज भी पूरा हो जाए तो यह सिंचाई परियोजना छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल दक्षिण बस्तर इलाके में बीजापुर और भोपालपट्टनम विकासखंडों और तहसीलों के हजारों किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। स्थानीय पत्रकार घनश्याम यादव का कहना है कि सिंचाई व बिजली के लिए इस बांध की शुरुआत की गई थी ऐसा कहा जाता है। उस दौरान हैदराबाद के निजाम का रियासत सबसे मजबूत रियासतों में था। जन श्रुतियों के अनुसार यहां के बुजुर्गों का कहना है कि किसी भयानक बीमारी प्लेग या हैजा फैलने से बांध के कार्य में लगे हुए मजदूरों की मौत होने लगी जिसके कारण यहां कार्यरत मजदूर काम अधूरा छोड़कर चले गए जिसके बाद से यह अधूरा निर्मित बांध आज भी अपने वैभवता के विरासत को सहेजे हुए वैसा ही खड़ा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बांध के निर्माण के लिए जिन पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा था, वह गोदावरी नदी के किनारे चेन्दूर गाँव के एक पहाड़ के पत्थर हैं। यह शोध का विषय हो सकता है, पत्थर कहां से लाए गए थे। अधूरा निर्मित बांध बेहद खूबसूरत पिकनिक स्थल के रूप में लोगों को आकर्षित करने लगा है। अधूरे बाँध के निर्माण की स्थिति को देखकर यह कहा जा सकता है कि भारत की विरासत के इंजीनियरिंग का स्तर कितना ऊंचा था। निजाम की रियासत काल में अधूरे बने बांध के लिए उपयोग में लाए गए भारी-भरकम पत्थरों को जिस तरह जोड़ कर इतने मजबूत बांध का निर्माण किया जा रहा था यह निसंदेह इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित होता लेकिन ऐसा हो न सका और यह बांध अधूरा रह गया। यह विचारणीय और चिंतन का विषय हो सकता है की दो सौ वर्ष पहले बीजापुर जिले का यह क्षेत्र कितना विकसित और आगे था। जहां बांध का निर्माण किया जा रहा था ऐसी स्थिति में यदि इस बांध का निर्माण पूरा कर लिया जाता तो यह क्षेत्र एक समृद्ध क्षेत्र के रूप में आज विकसित हो चुका होता। अधूरे बांध के अवशेष को देखने से ऐसा प्रतीत होता है की सीमेंट के बिना केवल रेत व चुने से जुड़े हुए मोटे-मोटे व भारी भरकम दीवारें आज वैसे ही स्थापित है जैसे इसे 200 वर्ष पूर्व यहां अधूरा छोड़ा गया था। ज्ञात हो कि यहाँ से तेलंगाना राज्य की सीमा प्रारंभ होती है और गोदावरी नदी का तट चौड़ा है। खूबसूरत विहंगम दृश्य मन को बहुत देर तक बांधे रखता है। बांध के अवशेष ,बड़ी बड़ी चट्टानें रेत का एक पूरा आँगन हरियाली ,जंगल अपने आप में मनोहर दृश्य बनाते हैं। अधूरे निर्मित इंचमपल्ली बांध की उपयोगिता पर प्रशासनिक स्तर पर इसके पुनर्निर्माण से इसके लाभ पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। जिस दिशा में नक्सलवाद का ख़ौफ आजादी के 07 दशक के बाद भी यह प्रशासनिक अधिकारियों और आम लोगों के पहुंच से दूर हो गया यह दुर्भाग्य का विषय है। अधूरे निर्मित इंचमपल्ली बांध के वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता के विषय पर विचार करने की आवश्यकता है। यदि इस बांध के स्वरूप को उपयोगिता के अनुसार ठीक करने का कार्य भी कर दिया जाए तो यह परियोजना भोपालपटनम-बीजापुर जिले के लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है। बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी कल अधूरे निर्मित इंचमपल्ली बांध को देखने गए हुए थे। उन्होंने इसकी खूबसूरती को देखते हुए अधूरे निर्मित इंचमपल्ली बांध स्थल हो पर्यटन के लिए विकसित करने के संबंध में प्रयास करने की बात कही है। लेकिन स्थानीय बुद्धिजीवियों का यह मानना है कि पर्यटन के साथ-साथ इस अधूरे निर्मित बांध की उपयोगिता के संबंध में भी विचार किया जाना चाहिए।







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