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राज्य में शव का पोस्टमार्टम कराने छः घंटे भटकते रहे परिजन, डॉक्टरों के हड़ताल के कारण हुई परेशानी, जाने पूरी खबर

राज्य में शव का पोस्टमार्टम कराने छः घंटे भटकते रहे परिजन, डॉक्टरों के हड़ताल के कारण हुई परेशानी, जाने पूरी खबर
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कोरबा । डॉक्टरों की बेमियादी हड़ताल जहां जिंदा मरीजों के लिए आफत बन गई है, मौत के बाद मृतक के परिजनों के लिए भी बेइंतहां परेशानी वजह बन रहा । सुसाइड केस में किसी अपने को खो चुका एक परिवार सुबह से लेकर शाम तक पोस्टमार्टम कराने के लिए भटकता रहा। पहले तो उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया, पर कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं होने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। परिजनों ने जब हंगामा किया, तो उन्हें रानी धनराज कुंवर धरम अस्पताल भेज दिया गया। यहां आकर भी परेशानी खत्म नहीं हुई और डॉक्टर का इंतजार जारी रहा। आखिर में ग्रामीण क्षेत्र से आए चिकित्साधिकारी ने यह प्रक्रिया पूरी की।

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हड़ताल के तीसरे दिन शनिवार की सुबह सामने आया यह मामला रजगामार क्षेत्र का है। यहां रहने वाले एसईसीएल कर्मचारी संजय कुमार द्विवेदी ने अपने घर पर ही फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। पंचनामा कार्रवाई के बाद रजगामार पुलिस पोस्टमार्टम के लिए शव को लेकर परिजनों के साथ जिला अस्पताल पहुंची। यहां हड़ताल के कारण कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिला। सुबह से दोपहर तक इंतजार करते एक-एक कर छह घंटे गुजर गए पर ऐसे वक्त में भी कोई डॉक्टर मदद को तैयार न था। सब्र टूटा तो परिजनों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया तब कहीं जाकर ग्रामीण क्षेत्र में पदस्थ एक चिकित्सा अधिकारी को कॉल किया गया। इसके बाद शव को रानी धनराज कुंवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। जहां के लिए निर्धारित पुरानी बस्ती स्थित चीरघर में शाम करीब पांच बजे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूर्ण की गई। इस तरह समझा जा सकता है कि बीमारी से पहले ही परेशान होकर अपने दर्द की राहत की उम्मीद लेकर अस्पतालों का चक्कर लगा रहे मरीज इन दिनों किस कदर परेशान होने मजबूर हैं। उल्लेखनीय होगा कि एक दिन पहले भी बुंदेली के एक मरीज की मौत के बाद उसके पोस्टमार्टम के लिए पुलिस व परिजनों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी और काफी इंतजार के बाद प्रक्रिया पूरी की जा सकी थी।
 


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