BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |

वसंत पूर्णिमा पर व्रत करने से व्यक्ति के सारे पाप ख़त्म हो जाते हैं और

वसंत पूर्णिमा पर व्रत करने से व्यक्ति के सारे पाप ख़त्म हो जाते हैं और
Share

आज फाल्गुन महीने की आखिरी पूर्णिमा है. इन पूर्णिमा को वसंत पूर्णिमा भी कहा जाता है. चूंकि श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है, ‘मैं ऋतुओं में वसंत हूं.’ इसलिए वसंत पूर्णिमा के दिन भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा अर्चना और व्रत किया जाता है. वहीँ विष्णुधर्मोत्तर पुराण के अनुसार वसंत पूर्णिमा पर व्रत करने से व्यक्ति के सारे पाप ख़त्म हो जाते हैं और व्यक्ति की उम्र भी बढ़ती है. आइए जानते हैं वसंत पूर्णिमा किए जाने वाले व्रत की पूजा-विधि और महत्व के बारे में-

पूजा-विधि

वसंत पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठना चाहिए. इसके बाद पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए. स्नान करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद मंदिर या फिर घर में ही भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति पर जल चढ़ाना चाहिए. जल चढ़ाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण का ताजा दूध एवं पंचामृत से ‘क्लीं कृष्णाय नमः’ मंत्र का जप करते हुए अभिषेक करना चाहिए. अभिषेक के बाद भगवान श्रीकृष्ण को पीला वस्त्र पहनाकर उन्हें चंदन, अक्षत, मौली, अबीर, गुलाल, इत्र, तुलसी और जनेऊ चढ़ाना चाहिए. इसके बाद मिश्री मिले हुए मक्खन से भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाना चाहिए. इतना सब-कुछ करने के बाद भगवान की आरती करनी चाहिए और श्रद्धा अनुसार जरूरतमंद लोगों को दान देना चाहिए.

व्रत का महत्व


त्रिदोष से बचाव: ऋतुओं के बदलने पर हमारे शरीर में भी कुछ बदलाव होते हैं. इन बदलावों की वजह से हमारे शरीर में त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) बढ़ता है. त्रिदोष बढ़ने की वजह से हमारे शरीर में बिमारियों के होने की आशंका भी बढ़ जाती है. इसी त्रिदोष से बचने के लिए फाल्गुन महीने के आखिरी दिन यानी कि पूर्णिमा के दिन व्रत रखने की परंपरा बनाई गई.


सभी पापों से मुक्ति एवं मानसिक शांति के लिए

चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है और फाल्गुन महीने के आखिरी दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं के साथ आकाश में रहता है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली चीजें जैसे कि पानी, दूध, पंचामृत और मक्खन पर चंद्रमा का खास असर रहता है. इसी वजह से इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत करने से मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति के सारे पाप भी ख़त्म हो जाते हैं.


Share

Leave a Reply