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IBPS की क्लर्क भर्ती परीक्षा पर वित्त मंत्रालय ने लगाई रोक...जाने क्या है मामला

IBPS की क्लर्क भर्ती परीक्षा पर वित्त मंत्रालय ने लगाई रोक...जाने क्या है मामला
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वित्त मंत्रालय ने बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) की क्लर्क भर्ती परीक्षा पर रोक लगा दी है. कुछ राज्यों ने केवल हिंदी व अंग्रेजी माध्यम में इन परीक्षाओं को करने का विरोध किया था. इन राज्यों ने इस परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा का विकल्प भी देने की मांग की है. अब जब तक कि क्षेत्रीय भाषा का विकल्प देने पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता तब तक के लिए इस परीक्षा को टाल दिया गया है.

वित्त मंत्रालय ने इस बारे में एक बयान जारी करते हुए कहा कि, "क्लर्क कैडर की परीक्षा स्थानीय/क्षेत्रीय भाषाओं में कराने की मांग पर एक समिति का गठन किया गया है. समिति इस पूरे मामले पर गौर करेगी." मंत्रालय के बयान के अनुसार, "ये समिति अगले 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप देगी. तब तक के लिए इस परीक्षा पर लगी रोक जारी रहेगी. समिति की सिफारिशें आने के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा और उसके बाद ही परीक्षा आयोजित की जाएगी."


क्या है मामला


दरअसल IBPS ने सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंकों में क्लर्क लेवल के लगभग 3,000 पदों की भर्ती परीक्षा को लेकर पिछले हफ्ते एक विज्ञप्ति निकली थी. विज्ञप्ति के अनुसार इस परीक्षा को केवल हिंदी और अंग्रेजी माध्यम में ही देने का प्रावधान दिया गया था. जिसके बाद कई गैर-हिंदी भाषाई राज्यों ने इसका विरोध किया था. इन राज्यों का कहना है कि इस परीक्षा को स्थानीय भाषाओं में देने का विकल्प भी मिलना चाहिए.

 

कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर साधा निशाना


कर्नाटक में विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बैंकिंग परीक्षा में भाषा विवाद पर मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. साथ ही उन्होंने कन्नड़ लोगों के लिए परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा का विकल्प देने की मांग भी की. कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा, "नरेंद्र मोदी आईबीपीएस परीक्षा में कन्नड़ भाषा का विकल्प ना देकर यहां के अभ्यर्थियों के साथ धोखा कर रहे हैं. बैंकिंग परीक्षा को लेकर आईबीपीएस द्वारा जारी विज्ञप्ति भाजपा के कन्नड़ विरोधी रूख को दर्शाता है." साथ ही उन्होंने कहा कि, "केंद्र सरकार को इस मामले पर तुरंत कोई कदम उठाना चाहिए और कन्नड़ लोगों के साथ न्याय सुनिश्चित करना चाहिए."

 

 


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