अप्रशिक्षित शिक्षक के हाथो में नन्हे बच्चो का भविष्य, RTE का कर रहे उल्लंघन
शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के मापदंडों के खिलाफ प्रदेश के निजी और सरकारी स्कूलों में शिक्षक अभी भी पढ़ा रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक अभी भी निजी और सरकारी स्कूलों में 43 से अधिक शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने प्रशिक्षण लिया ही नहीं है और न ही इसके लिए कोई कोर्स ही किया है, जबकि आरटीई के नियमानुसार अप्रशिक्षित शिक्षकों को 31 मार्च 2015 तक ही प्रशिक्षित कर लेना था। पिछले सालों में राज्य सरकार ने अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षित कराने के लिए डीएड और डीएलएड कोर्स भी कराए। इसके बावजूद अभी तक अप्रशिक्षित शिक्षक स्कूलों में जमे हुए हैं। केंद्र सरकार का फरमान था कि 31 मार्च 2019 तक सभी शिक्षकों को प्रशिक्षित करना है।
इसके लिए केंद्र सरकार ने देश भर के अप्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए डीएलएड (डिप्लोमा इन एलिमेंटरी एजुकेशन) कोर्स कराया था। निजी और सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को यह कोर्स करना था इसके बाद भी कुछ शिक्षकों ने यह कोर्स नहीं किया। निजी स्कूलों में भी अप्रशिक्षितों के हवाले बच्चों को छोड़ दिया गया है।







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