BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |

अग्रसेन महाविद्यालय में हुआ हिंदी दिवस का आयोजन

अग्रसेन महाविद्यालय में हुआ हिंदी दिवस का आयोजन
Share

रायपुर। अग्रसेन महाविद्यालय, पुरानी बस्ती, में आज हिंदी दिवस पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ता ने हिंदी के महत्त्व को विभिन्न उदाहरणों से रेखांकित किया।

अपने संबोधन में शासकीय जे योगनंदम महाविद्यालय की हिंदी प्राध्यापक डॉ उर्मिला शुक्ल ने कहा कि किसी भी देश को राष्ट्र बनने के लिए कुछ सिद्धान्तों की आवश्यकता होती है। जिसमे राष्ट्रभाषा भी एक प्रमुख तत्व है। उन्होंने कहा कि भारत आजाद होते ही हम अंग्रेजीदा हो गए और हिंदी राजनीति का शिकार हो गई। जबकि हिंदी ही हमारी पहचान है और यही हमारी अस्मिता भी है।

हिंदी विश्व की दूसरे नंबर की भाषा है इसका मुख्य कारण यह नहीं कि यह पूरे विश्व में बोली जाती है इसका कारण यह है कि भारत की जनसंख्या इतनी ज्यादा है कि यहां इस भाषा को बोलने वाले लोग सर्वाधिक संख्या में हैं. डॉ उर्मिला शुक्ल ने कहा कि हमें अपनी बात को अपनी भाषा में रखने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि हम अपनी पहचान अपनी भाषा से ही बना सकते हैं, दूसरे की भाषा से नहीं।

महाविद्यालय के डायरेक्टर डॉ वी.के. अग्रवाल ने कहा कि हमारे मन मे अंग्रेजी के प्रति ज्यादा सम्मान होना ही, वास्तव में हिंदी को कमज़ोर बना रहा है। उन्होंने कहा कि बहुत सी जटिल व्याख्या और प्रक्रिया को मातृभाषा मे आसानी से सुलझाया जा सकता है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ युलेन्द्र कुमार राजपूत ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि हिंदी का महत्त्व भारत के अलावा विश्व के अनेक देशों में लगतार बढ़ रहा है. इसलिए इसकी प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी। महाविद्यालय के एडमिनिस्ट्रेटर प्रो. अमित अग्रवाल ने आमंत्रित वक्ता को उनके सारगर्भित सम्बोधन के लिए साधुवाद दिया। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की हिंदी की प्रध्यापक डॉ. डॉली पाण्डेय ने किया. इस आयोजन में महाविद्यालय के सभी विभागों के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।


Share

Leave a Reply