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इंद्रावती टाइगर रिजर्व बना नक्सलियों का सुरक्षित आश्रय स्थल

 इंद्रावती टाइगर रिजर्व बना नक्सलियों का सुरक्षित आश्रय स्थल
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जगदलपुर। संभाग में बना इंद्रावती टाइगर रिजर्व शेरों की आबादी बढ़ाने और उन्हें प्राकृतिक रूप से सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में 1981 में इंद्रावती नेशनल पार्क की स्थापना की गई थी। अब इस टाइगर रिजर्व में शेरों का नहीं वरन नक्सलियों का सुरक्षित आश्रय स्थल बन चुका है और यहां पर जाने में सुरक्षा बलों को भी कठिनाई होती है। इस इंद्रावती टाइगर रिजर्व का पूरा क्षेत्र करीब 2799.08 वर्ग किमी है और यह क्षेत्र पूर्व में बाघ व वन भैंसों के लिए बस्तर में एक मात्र स्थल था। इस संरक्षित वन क्षेत्र में बीजापुर जिले के अंतर्गत आने वाले सेण्डरा, पिल्लूर, सागमेटा आदि गांवों में पिछले दो दशक से भी अधिक समय से नक्सलियों का सुरक्षित आश्रय स्थल बन चुका है और यहां पर जंगलों में विचरन करने वाले जीव जन्तु दूसरी जगह या तो चले गये हैं या उन्हें शिकार कर हटा दिया गया है। इस प्रकार इस संरक्षित वनक्षेत्र में प्रवेश करना खतरे से खाली नहीं है। 


उल्लेखनीय है कि इस स्थिति से शेरों सहित दूसरे वन्य जीवों की न केवल गणना प्रभावित हुई है वरन पार्क में पर्यटकों के साथ-साथ शोधार्थियों का पहुंच पाना भी मुश्किल हो गया है। क्षेत्र के फरसेगढ़ से सागमेट, सेण्डरा, पिल्लूर आदि गांवों के पड़ाव में नक्सलियों की तगड़ी दखल है। पूरे क्षेत्र के रास्ते में नक्सलियों ने बैरियर खड़े कर रखे हैं, वहीं माइल स्टोन, पेड़ के तने, घरों की दीवारों के अलावा गांव-गांव में स्मारक खड़े हैं। यहां जनताना अदालत और सभाओं के आयोजन की नक्सली बिना डर के सरलता से कर रहे हैं। 1980 के दशक में स्थापित इंद्रावती टाइगर रिजर्व में नक्सलियों ने प्रवेश कर टाइगर सहित दूसरे वन्य जीवों के प्रवेश को रोक दिया है और आज यहां पर सामान्य सैलानी जाने के लिए हिम्मत नहीं करता है। 

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