मासूम बच्चे बस्ते की बोझ से हो रहे पीठ दर्द से परेशान, जाने पूरी खबर
कम उम्र में ही स्कूली बच्चे उठा रहे 10 से 15 किलो का वजन
रायपुर । मासूम बच्चों को बस्ते के बोझ से बचपन में ही कमर व पीठ के दर्द से परेशान होना पड़ रहा है। स्कूली बच्चों को नर्सरी क्लास से ही भारी-भरकम बस्तों की बोझ तले लाद दिया जाता है। स्कूलों से घर आते ही मासूम बच्चे पीठ व कमर दर्द की परेशानी होने की शिकायत अपने परिजनों से करते है। जिस उम्र में बच्चे ठीक से चल नही सकते उस उम्र में बच्चों के पीठ पर 10 से 15 किलों को बैग लाद दिया जा रहा है। स्कूलों में भारी-भरकम बैग को लेकर बच्चे दूसरी व तीसरी,चौथी मंजिलों में पढऩे के लिये सीढिय़ां चढ़कर जाते है। स्कूल प्रबंधन द्वारा सालदर साल फीस बढ़ोत्तरी तो की जा रही है। लेकिन बच्चों की परेशानी नजर नही आ रही है। शिक्षा विभाग द्वारा भी अभी तक स्कूलों में छोटे बच्चों को बस्ते के बोझ से निजात दिलाने के लिये कोई प्रावधान नही कर पाने के चलते बच्चों को बस्तों का बोझ उठाना पड़ रहा है। उक्त बिषय में केन्द्रीय मानव संसाधन द्वारा अनकेकों बार राज्यस्तर पर सेमिनारों का आयोजन कर बच्चों की पीठ से बस्ते का बोझ कम करने के संबंध में आयोजन किये जाते रहे। बावजूद इसके अभी तक विषेशज्ञ किसी नतीजे पर नही पहुंचे है। जिसके कारण बच्चों को आये दिन बस्तों के बोझ की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरएनएस प्रतिनिधि संजय द्वारा इस संबंध में डाक्टरों से चर्चा करने पर ज्ञात हुआ की कम उम्र में ही बच्चों को भारी-भरकम बस्ते पीठ पर लादने के चलते हड्डियों से संबंधित बीमारियां होती है। जिसके चलते बच्चों का शारीरिक विकास रुक जाता है,साथ ही पीठ में स्थित हड्डियों लगातार दर्द बने रहने के कारण आये दिन स्लिप डिस्क की शिकायत होने से रीढ़ की हड्डी कमजोर हो जाती है जिसके चलते कई बार गंभीर स्थिति निर्मित होने पर बच्चों के अभिभावकों को न्यूरो सर्जन के पास जाकर स्पाईन सर्जरी करवानी पड़ती है।







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