सुनियोजित था चीनी सैनिकों का भारतीय सैनिकों पर हमला,भारतीय सैनिकों की संख्या जानने के लिए थर्मल इमेजिंग ड्रोन का किया था इस्तेमाल
नई दिल्ली, सोमवार को गलवान घाटी में भारत और चीन की सेना के बीच झड़प चीन की सुनियोजित साजिश थी। इलाके में भारतीयों की सही संख्या जानने के लिए चीनी सैनिकों ने थर्मल इमेजिंग ड्रोन का इस्तेमाल किया था। यही कारण था कि हमले के दौरान भारतीय फौजों की संख्या कम पड़ गई। चीनी सैनिकों ने धोखे से पेट्रोलिंग प्लाइंट 14 पर तब भारत की छोटी टुकड़ी को निशाना बनाया जब यह टुकड़ी बस ये जानने गई थी कि चीन ने वादे केमुताबिक स्टैंड ऑफ स्थिति से हटे हैं या नहीं।
कर्नल संतोष बाबू केनेतृत्व में मौके का मुआयना करने पहुंची टुकड़ी ने देखा कि वादे और सहमति के बावजूद चीनी सेना ने स्टैंड ऑफ स्थिति से हटना तो दूर वहां टैंट लगा रखा है। इस पर भारतीय जवानों की चीनी जवानों के बीच कहासुनी हुई। ऐसा लगा जैसे चीनी सेना पूरी तैयारी में थी। अचानक मौके पर मौजूद चीनी जवान भारतीय सैनिकों से भिड़ गए। फिर नजदीक केपहाड़ों से भारतीय टुकडिय़ों पर पत्थर की बरसात होने लगी। फिर पूर्व तैयारी के साथ डटे चीनी सैनिकों ने कटीले तारों लगे रॉड और पत्थरों से हमला कर दिया। उस दौरान मौके पर भारत की तुलना में चीन के सैनिकों की संख्या पांच गुना ज्यादा थी।
वांग यी-एस जयशंकर में बातचीत: भारतीय विदेश मंत्री द्वारा चीन को कड़ा संदेश गिया गया, "गलवान में जो हुआ वह चीन द्वारा पूर्व नियोजित और योजनाबद्ध कार्रवाई थी जो घटनाओं के अनुक्रम के लिए जिम्मेदार है।" pic.twitter.com/HyegdbLUCP
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 17, 2020
सूत्रों ने कहा कि इसके बावजूद भारतीय सैनिक जांबाजी से लड़े। चूंकि भरत को इस तरह के धोखे का अंदाजा नहीं था। चीनी सैनिक मैत्रीपूर्ण इशारे कर रहे थे। दोनों ओर के सैन्य अधिकारियों हरिंदर सिंह और लिन लिऊ के बीच स्टैंड ऑफ स्थिति से चीनी सैनिकों के पीछे हटने पर सहमति बनी थी। ऐसे में भारतीय सेना ने इस प्रकार से रणनीति और पूर्व तैयारी के साथ हमले की उम्मीद नहीं की थी। इसी कारण मौकेका मुआयना करने भी सेना की छोटी टुकड़ी पहुंची थी।
सूत्रों ने कहा कि चूंकि हमला अचानक और पूर्व तैयारी के साथ किया गया, इसलिए भारतीय सेना केजवान बुरी तरह से घिर गए। हालांकि चीनी सैनिकों की तुलना में पांच गुना कम सैनिक होने के बाजवूद मौकेपर छह से सात घंटे तक खूनी झड़प हुई। अचानक हमले से बुरी तरह घायल भारतीय सैनिक शून्य तापमान के कारण भी बड़ी संख्या में हताहत हुए।







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