जैन श्रमण संघ ने स्कूलों में अंडा परोसे जाने की घोर निंदा,कहा संस्कारो से छेडछाड बर्दास्त नहीं
छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा प्राथमिक एवं मिडिल स्कूलों में मध्यान्ह भोजन में बच्चों को अंडा वितरण किया जा रहा है स्कूली बच्चों को अंडा मिलने के बाद सभी बच्चे सामूहिक रूप से बैठकर के भोजन कर रहे हैं यह घोर निंदनीय कृत्य है विभिन्न सामाजिक संगठनों के द्वारा पूर्व में इसके लिए जगह-जगह पर धरना और ज्ञापन सौंपा गया था इसके बावजूद भी छत्तीसगढ़ शासन स्कूलों में अंडा परोसने का कार्य जारी किया है विद्यालय एक संस्कार देने का मंदिर होता है लेकिन इस मंदिर को आज मांसाहारी भोजनालय बनाकर अंडा खाने के लिए बच्चों को विवश किया जा रहा है अबोध एवं नासमझ बच्चों को यह निर्णय दिया जा रहा है कि वह क्या खाएं क्या ना खाएं आदि काल से हमारे ऋषि मुनि यह बताते आ रहे हैं कि अंडा एक तामसी भोजन है और इसको खाने से हमारे शरीर में तामसी व्रतियों का विकास होता है बालक इससे मनोविकार से ग्रसित हो जाता है साथ ही कठोर कृत्य के लिए आक्रोशित हो जाता है ऐसी परिस्थिति में नौनिहाल बालकों को अंडा खिलाया जाना बेहद ही शर्मनाक बात है जानकारी के अनुसार सप्ताह में 1 दिन बुधवार को जिले के स्कूलों में अंडा वितरण की शुरुआत की गई है और इसके लिए संकुल समन्वयक के आला अधिकारी व कर्मचारी से लेकर के स्कूल के शिक्षकों को भी इस कार्य में मशक्कत करनी होगी आजकल के शिक्षक शिक्षा संस्कार देने के बजाय बच्चों को सिर्फ खिलाने पिलाने के लिए ही रह जाएंगे शैक्षणिक कार्यों को छोड़कर के शिक्षकों को इस तरह से कार्यों में लगाना भी उचित नहीं है अंडा के विरोध में जैन संत छत्तीसगढ़ प्रवर्तक श्री रतन मुनि जी महाराज महा साध्वी श्री प्रियदर्शन जी एवं साध्वी लब्धि यशा जी ने छत्तीसगढ़ सरकार के इस लेने पर गहरा विरोध दर्ज करते हुए वीर प्रभु परमात्मा से प्रार्थना की है कि सरकार को सद्बुद्धि प्रदान करें पूर्व में विभिन्न समाजो के विरोध प्रदर्शन के पश्चात सरकार ने यह सांत्वना दिया था कि स्कूलों में अंडा वितरण नहीं किया जाएगा उन्हें घर में पहुंचा करके दिया जाएगा लेकिन स्कूलों में अंडा वितरण किया जाना सरकार की तानाशाही प्रवृत्ति को उजागर कर रही है सरकार की इस प्रवृत्ति को देखते हुए ऐसा महसूस हो रहा है कि आने वाले समय में स्कूलों से मां सरस्वती की मूर्ति को हटाकर के मधुशाला खोलने की तैयारी की जा रही है अंडा खिलाने के नाम पर कमीशन खोरी का यह गोरखधंधा बनाया जा रहा है जो पालक अपने बच्चों को संस्कार देना चाह रही है सरकार अपनी तानाशाही प्रवृत्ति के कारण से बच्चों के भविष्य को अंधकार की गर्त में दबाने की कोशिश कर रही है विभिन्न सामाजिक संगठन विशेषकर के कबीरपंथी परिवार गायत्री परिवार जैन समाज एवं सर्व शाकाहारी समाज इसके पुरजोर विरोध में आगे आ चुकी है यदि अंडा वितरण तुरंत बंद नहीं किया जाएगा तो भविष्य में और धरना प्रदर्शन या कड़ी कार्यवाही की जाएगी अंडा वितरण यदि समाप्त नहीं किया जाता है तो सर्व शाकाहारी समाज जिससे शासन को इस नगरी निकाय चुनाव में विरोध एवं छत्तीसगढ़ शासन नुकसान की के लिए तैयार रहे जिस विद्यालय में शाकाहारी शिक्षक शिक्षिकाएं है उनके माध्यम से अंडा वितरण करने से वह मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं अंडा एक मांसाहारी भोजन है यह किसी भी वनस्पति से उगता नहीं है अपितु मुर्गी से उत्पन्न होता है और अंडे के अंदर भी जीव पाया जाता है जिससे इसका विकास होते रहता है और अंडा को भोजन के रूप में प्राप्त करना एक जीव हत्या का दोष लगता है
छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा अबोध बालकों को पाप का भागीदार बनाया जा रहा है जिस विद्यालय में भावी भविष्य का निर्माण किया जाता है वहां उन्हें मांसाहारी बनाने की तैयारी चल रही है श्री जैन श्रमण संघ के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सरकार के इस कृत्य पर विरोध जताया है श्रमण संग दुर्ग के अध्यक्ष निर्मल बाफना मंत्री टीकम छाजेड़ प्रेम चौरड़िया प्रवीण श्री श्रीमाल
विजय करनावट सुरेश लुनिया हरिश श्री श्री माल रमेश बाधमार विनय देश लहरा प्रकाश काकरिया सरिता श्री श्री माल सपना संचेती श्रेया बाघमार युक्ता बोहरा ने संयुक्त रुप से कहा कि यदि सरकार ने लगातार अंडा वितरण जारी रखा तो हम इसका विरोध जारी रखेंगे हम बच्चै स्कूल विद्या अध्ययन के लिए जाते हैं और वहां उन्हें सिर्फ अध्यन करा कर ज्ञान सिखाया जाए विद्यालय एक मंदिर है इसे मंदिर ही रहने दें मधुशाला में परिवर्तित ना करें अन्यथा सरकार भविष्य के धरना प्रदर्शन के लिए तैयार रहें







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