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महाशिवरात्रि : इस तरह करें महाशिवरात्रि में शिव जी की आराधना, भगवन शिव होंगे प्रसन्न

महाशिवरात्रि : इस तरह करें महाशिवरात्रि में शिव जी की आराधना, भगवन शिव होंगे प्रसन्न
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हिन्दू धर्म में महाशिवरात्रि पर्व बेहद ही खास माना जाता है, इस दिन रात्रि में शिव और माता पार्वती पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं रात्रि में जो लोग उनका पूजन अर्चन करते हैं उन्हें भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है, और उनकी हर कामना पूर्ण हो जाती है। शिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन का महापर्व है।

पंचांग के मुताबिक इस बार महाशिवरात्रि महापर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी व चतुर्दशी का विशेष संयोग बना है। ऐसे में इस साल महाशिवरात्रि पर्व 01 मार्च, मंगलवार को आज मनाया जा रहा है। ज्योतिष विशेषज्ञ पं ध्रुव कुमार शास्त्री ने बताया कि इस दिन रात 1.59 बजे से 12.17 मिनट महाशिवरात्रि पर्व का पुण्य मूहुर्त रहेगा। धनिष्ठा नक्षत्र के साथ महान कल्याणकारी ‘शिवयोग भी रहेगा। इस दौरान गंगा स्नान के साथ द्वादशज्योर्तिलिंग की पूजा अर्चना करने से शिव कृपा प्राप्त होगी।

ज्योतिष में ‘सिद्धयोग को काफी शुभ माना जाता है और इस योग के दौरान किए गए सभी कार्य सफल होते हैं। इस योग के दौरान शिव भगवान की पूजा करने से पुण्यफल की प्राप्ति जरूर होती है। इन योगों के दौरान रुद्राभिषेक, शिव नाम कीर्तन, शिवपुराण का पाठ व शिव जी के मंत्रों का जाप करने से उत्तम फल भी मिलता है। शिवरात्रि पर दान पुण्य करना व ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना अतिशुभ माना गया है।

शिवलिंग पूजा-
शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक है और शिव का अर्थ है– कल्याणकारी और-लिंग का अर्थ है सृजन, सर्जनहार के रूप में-लिंग की पूजा होती है. संस्कृत में—लिंग का अर्थ है प्रतीक। भगवान शिव अनंत काल के प्रतीक हैंआ मान्यताओं के अनुसार, लिंग-एक विशाल लौकिक अंडाशय है, जिसका अर्थ है ब्रह्माण्ड, इसे ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है।

शिवरात्रि व्रत की पूजा-विधि
1. मिट्टी के लोटे में पानी या दूध भरकर, ऊपर से बेलपत्र, आक-धतूरे के फूल, चावल आदि डालकर ‘शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। अगर आस-पास कोई शिव मंदिर नहीं है, तो घर में ही मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उनका पूजन किया जाना चाहिए।

2. शिव पुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप इस दिन करना चाहिए।

3. शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार शिवरात्रि का पूजन ‘निशीथ काल में करना सर्वश्रेष्ठ रहता है।


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