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घर-घर पधारेंगे मंगलमूर्ति….गणेश चतुर्थी आज, जानिए व्रत कथा, शुभ मुहूर्त से लेकर सबकुछ

घर-घर पधारेंगे मंगलमूर्ति….गणेश चतुर्थी आज, जानिए व्रत कथा, शुभ मुहूर्त से लेकर सबकुछ
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 आज गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है. हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी का बड़ा महत्व है, वैसे तो हर महीने गणेश चतुर्थी का व्रत आता है और इसे संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है, लेकिन भाद्रपद मास में आने वाली गणेश चर्तुर्थी अपने आप में खास होती है क्योंकि इस दिन से गणेश उत्सव की शुरुआत होती है. जिसकी धूम पूरे देशभर में देखने को मिलती है.पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी तिथि का आरंभ 6 सितंबर की दोपहर 3 बजकर 01 से होगा और समापन 7 सितंबर की शाम 5 बजकर 37 पर होगा. उदयाति​थि होने के कारण गणेश चतुर्थी 7 तारीख को ही मनाई जाएगी. जिसके लिए मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 4 मिनट से दोपहर 1 बजकर 34 मिनट तक रहेगा

गणेश चतुर्थी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, बात उस समय की है जब भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विवाह हुआ था. इस विवाह में शामिल होने के लिए सभी देवी-देवताओं, गंधर्वों और ऋषियों-मुनियों को निमंत्रण दिया गया लेकिन भगवान गणेश को आमंत्रण नहीं मिला. जब बारात में सभी शामिल हुए तो भगवान गणेश के ना आने का कारण पूछा, जिस पर भगवान विष्णु ने कहा कि भगवान शिव को न्यौता दिया गया है और यदि गणेश उनके साथ आना चाहते हैं तो आ जाएं.भगवान विष्णु ने यह भी कहा कि गणेश जी भोजन बहुत ज्यादा करते हैं और हम किसी और के घर उन्हें भरपेट भोजन कैसे कराएंगे. इस पर देवताओं ने एक सुझाव रखा कि गणेश जी को बुला लेते हैं, लेकिन उन्हें विष्णुलोक की सुरक्षा करने को कह देंगे, जिससे वे बारात में नहीं जा सकेंगे. ऐसे में बुलाने का कार्य भी पूरा हो जाएगा और भोजन कराने से भी बचा जा सकेगा.

गणेश चतुर्थी व्रत में नहीं खानी चाहिए ये चीजें

गणेश चतुर्थी व्रत के दिन लहसुन, प्याज, मूली, चुकंदर आदि का सेवन नही करना चाहिए. इस दिन व्रत वाला सेंधा नमक ही इस्तेमाल करें, सादा नमक या काले नमक का प्रयोग इस दिन न करें. इस दिन किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन, मदिरा और हर प्रकार के नशे से दूर रहना चाहिए.

गणेश चतुर्थी पर करें ये काम

  • घर या पूजा स्थल पर गणेश की सुंदर प्रतिमा स्थापित कर, उसे अच्छे से सजाएं फिर उसके बाद पूरे विधि विधान से पूजा करें.
  • गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी को अपने घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में विधि-विधान से बिठाएं, इस दिशा में उनकी पूजा करना शुभ माना जाता है.
  • गणेश भगवान जी को लाल रंग बहुत प्रिय होता है, इसलिए उनकी पूजा में लाल रंग के वस्त्रों का इस्तेमाल करें, जैसे गणपति बप्पा को लाल रंग के वस्त्र के आसन के ऊपर विराजमान करें और उनको लाल रंग के वस्त्र पहनाएं. गणपति जी की पूजा में लाल रंग के पुष्प, फल, और लाल चंदन का प्रयोग जरूर करें.
  • गणेश भगवान की पूजा में दूर्वा घास, फूल, फल, दीपक, अगरबत्ती, चंदन, और सिंदूर और गणपति जी के प्रिय लड्डू और मोदक का भोग जरूर लगाएं.

गणपति की पूजा में दस दिनों तक भगवान गणेश के मंत्र जैसे ॐ गण गणपतये नमः का जाप जरूर करें.

गणेश चतुर्थी पर न करें ये काम

  • गणेश चतुर्थी पर अपने घर में भूलकर भी गणपति की आधी-अधूरी बनी या फिर खंडित मूर्ति की स्थापना या पूजा न करें. ऐसा करना अशुभ माना जाता है.
  • गणपति जी की पूजा में भूलकर भी तुलसी दल या केतकी के फूल का प्रयोग नहीं करना चाहिए. मान्यता के अनुसार ऐसा करने पर पूजा का फल नहीं मिलता है.
  • गणेश चतुर्थी के दिन व्रत एवं पूजन करने वाले व्यक्ति को तन-मन से पवित्र रहते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
  • गणेश चतुर्थी के दिनों में भूल से भी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • गणेश चतुर्थी के दिनों में गुस्सा करना, विवाद करना या परिवार के सदस्यों के साथ झगड़ना नहीं चाहिए.

पूजा विधि

गणपति की पूजा में एक साफ और शांत जगह पर आसन बिछाएं और गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. मूर्ति को गंगाजल से शुद्ध करें. उसके बाद रोली, चंदन और फूलों से गणेश जी को सजाएं. उनकी सूंड पर सिंदूर लगाएं और दूर्वा चढ़ाएं. फिर घी का दीपक और धूप जलाएं. गणेश जी को मोदक, फल का भोग लगाएं. पूजा के आखिर में गणेश जी की आरती और ॐ गण गणपतये नमः मंत्र का जाप कर गणेश जी से अपनी मनोकामनाएं मांगें.


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