BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |

एनडीपीए संशोधन विधेयक संसद में पारित हुआ , जाने इसके विषय में ...

एनडीपीए संशोधन विधेयक संसद में पारित हुआ , जाने इसके विषय में ...
Share

नई दिल्ली : राज्यसभा में सोमवार को सरकार ने एनडीपीएस संशोधन विधेयक पेश किया। चर्चा के बाद सदन ने ध्वनिमत से इस विधेयक को पारित कर दिया गया। लोकसभा से यह पहले ही 13 दिसंबर को पारित हो चुका है। विधेयक पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि त्रिपुरा हाईकोर्ट के आदेश की अनुपालना के लिए सरकार को सितंबर में अध्यादेश लाना पड़ा था।


इसी दौरान पता चला कि 2014 में पारित किए गए एनडीपीएस संशोधन अधिनियम में कुछ लिपिकीय त्रुटियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए यह विधेयक पेश किया गया है। विधेयक पर चर्चा के दौरान सपा सांसद जया बच्चन ने कहा था कि सरकार लिपिकीय गलतियों को ठीक करने में सदन के तीन-चार घंटे बर्बाद कर रही है, जबकि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा ही नहीं हो रही।


वहीं, कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिस लिपिकीय गड़बड़ी की बात की जा रही है, उसकी पहचान करने में नार्कोटिक ब्यूरो और सरकार को छह वर्ष से ज्यादा लग गए। इसका जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि दिग्विजय सिंह और जया बच्चन जिस छोटी गलती को पकड़ने में समय बर्बाद करने की बात कर रहे हैं, असल में वह गलती यूपीए सरकार की तरफ से की गई थी, क्योंकि यह विधेयक मूल रूप से 2011 में पेश किया गया था और फरवरी 2014 में पारित किया गया था।

 


Share

Leave a Reply