दो साल में प्रदेश के एक भी युवा को नहीं मिली सरकारी नौकरी
भोपाल : रायसेन जिले की सेमरी निवासी रश्मि सिंह ने बीकॉम की डिग्री ली है। सरकारी नौकरी पाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। भारकच्छ के लोकेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने बीए करने के बाद आईटीआई किया है, लेकिन सरकारी नौकरी तो दूर प्राइवेट क्षेत्र में भी जॉब नहीं मिली। शाजापुर के दिनेश सिंह ने एमकॉम किया और सरकारी नौकरी पाने के लिए काफी हाथ-पैर मार चुके हैं। अब एक कंपनी में सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर रहे हैं। यह हाल इन्हीं युवाओं की नहीं बल्कि प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत 30 लाख बेरोजगार नौकरी पाने की लाइन में खड़े हैं।
सरकार हर साल बैकलॉग के पद भरने के लिए विशेष अभियान भी चला रही है। कोरोना की वजह से दो सालों से पीईबी द्वारा भी परीक्षाएं आयोजित नहीं की गई। बीच-बीच में कुछ परीक्षाएं कराई गई, लेकिन सरकारी नौकरी पाने वालों की संख्या हजार और लाखों में रहती है, जिसके कारण प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या बढ़ रही हे। रोजगार एवं कौशल विभाग के अनुसार वर्ष 2020-21 में मप्र में 1444547 शिक्षित युवाओं ने अपने पंजीयन रोजगार कार्यालयों में कराया है।
इसी तरह वर्ष 2021-22 में 31 नवम्बर तक एक लाख 99344 युवाओं ने पंजीयन कराया। सरकार का फोकस भी सरकारी नौकरी के स्थान पर बेरोजगारों को प्राइवेट क्षेत्र में नौकरी लगवाने का है। सरकार ने वर्ष 2020-21 में 80717 युवाओं को प्राइवेट कंपनियों तथा उद्योगों के माध्यम से ऑफर लेटर दिए गए हैं। वर्ष 2021-22 में 61199 युवाओं को ऑफर दिए गए, लेकिन इनमें से 50 से 60 फीसदी को ही प्राइवेट क्षेत्र में नौकरी मिल सकी। यानि बीते दो सालों में एक भी युवा को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी है।







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