27 सितंबर का पंचांग: पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान, जानें अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल का समय
Aaj Ka Panchang: हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है. 27 सितंबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि रात 8:58 बजे तक रहेगी. इसके बाद द्वितीया शुरू हो जाएगी. रविवार सुबह 6:20 बजे सूर्योदय और शाम 5:14 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, शाम 6:35 चंद्रोदय और सुबह 7:38 बजे चंद्रास्त होगा.
आज का पंचांग
27 सितंबर को मुख्य रूप से पितरों (पूर्वजों) के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाएगा. इस दिन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि (पहला श्राद्ध) है. इसके साथ ही इस दिन भगवान विष्णु और सूर्य देव की उपासना करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है. रविवार सुबह 11:17 बजे तक वृद्धि योग रहेगा और उसके बाद ध्रुव योग शुरू हो जाएगा. पंचांग के अनुसार, वृद्धि योग सत्ताईस (27) योगों में से 12वें नंबर का एक अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण योग माना जाता है. जब सूर्य और चंद्रमा की गतियों के बीच की ज्योतिषीय स्थिति (कुल देशांतर योग) 133 डिग्री 20 मिनट से 146 डिग्री 40 मिनट के बीच होती है, तब वृद्धि योग का निर्माण होता है. इस योग के मुख्य स्वामी सूर्य देव हैं. इस योग में जन्म लेने वाले जातक बहुत भाग्यशाली, दयालु, विनम्र और परोपकारी स्वभाव के होते हैं.
अभिजीत मुहूर्त
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है. आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं. जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है.
रविवार को सुबह 6:25 से 7:59 बजे तक अमृत काल रहेगा. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) होता है. इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है. नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ, और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है.
राहुकाल का समय
इस दिन राहुकाल शाम 4:45 बजे से 6:14 बजे तक रहेगा. हिन्दू ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है. स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है. इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है.
गुलिक काल
रविवार को गुलिक काल दोपहर 3:16 से शाम 4:45 बजे तक रहेगा. गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है. यह एक उपग्रह है, इसको अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं. इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उनको जारी रखा जा सकता है. जो काम बार-बार करना चाहते हैं तो इस काल में किया जा सकता है. बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है.
यमगंड काल
इस दिन यमगंड काल दोपहर 12:17 से 1:47 बजे तक रहेगा. यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है. इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए. इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने से बचना चाहिए और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए.





















