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पुलिस ने मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाए बच्चे और महिलाएं,आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाए बच्चे और महिलाएं,आरोपी गिरफ्तार
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कोंडागांव। आदिवासी अंचल भोले भाले बालक-बालिकाओं, महिलाओं को कुछ लोग ज्यादा पैसों मे काम दिलाने का लालच देकर अन्य राज्यों में बंधुआ मजदूरी कराए जाने की शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए कोंडागांव पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने लंबी जांच पड़ताल और घेराबंदी के बाद 5 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया है और इनके चंगुल से 70 ऐसे बच्चों और महिलाओं को मुक्त कराया गया है जो अन्य राज्यों में बंधुआ मजदूर के तौर पर बेच दिए गए थे।

कोंडागांव जिले के पुलिस अधीक्षक सुजीत कुमार ने इसका खुलासा करते हुए बताया कि सिटी कोतवाली थाना कोण्डागांव में पिछले दिनों बालिका सूपति सोरी की मां सैनी सोरी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि माह सितम्बर-अक्टूबर 2018 में कुछ लोग उसकी बेटी सुपति और क्षेत्र के अन्य बालक-बालिकाओं को बहला फुसला कर अधिक मजदूरी दिलाने का लालच देकर चेन्न्ई ले गए हैं, जहां उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है।

बीमारी की हालत में भी उनसे मजदूरी कराई जा रही है और उन्हें वापस घर लौटने नहीं दिया जा रहा। इसी तरह थाना माकड़ी क्षेत्र में भी अधिक मजदूरी का लालच देकर कुछ महिलाओं और बालिकाओं को दूसरे राज्य ले जाने व जबरन बंधक बनाकर मजदूरी कराने की शिकायत मिली थी।

इसी बीच पुलिस थाना फरसगांव को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गांव के रहने वाले बादसाय नेताम और रामसाय नेताम क्षेत्र के 15 लोगों को जिनमें अधिकांश नाबालिग हैं, उन्हें बहला फुसलाकर हैदराबाद ले जा रहे हैं। सूचना की तस्दीक करते हुए जिला पुलिस की विशेष टीम तमिलनाडु के सेलम रवाना हुई और उनके द्वारा सुनियोजित तरीके से घेराबंदी कर आरोपितों को पकड़ा गया

आरोपियों को न्यायिक रिमाण्ड पर भेज दिया गया है। पूरे रेस्क्यू अभियान में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के 42 बालिकाओं 28 बालक को सकुशल वापस लाया गया। पुलिस का कहना है कि अभी करीब 300 और बालक बालिकाएं और महिलाएं बंधकों के कब्जे में हैं और इनसे सेलम, चेन्न्ई, हैदराबाद सहित कुछ अन्य शहरों के उद्योगों में बतौर बंधुआ मजदूर काम लिया जा रहा है। इन्हें भी जल्द ही छुड़ा लिया जाएगा। 


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