विद्युत कंपनी के पावर प्लांट में कर्मियों के पद रि-स्ट्रक्टर के बाद कर्मियों की लटकी पदोन्नति, जाने कहा की है ये खबर
कोरबा | विद्युत कंपनी के पावर प्लांट में कार्यरत कर्मियों के रिक्त पद पर रि-स्ट्रक्चर के बाद पदोन्नति के आधार पर भरने व हायर पे स्केल लेने वाले कर्मियों को उक्त पद के अनुरूप सेवानिवृत्ति देने का मामला अब लटक गया है। प्रबंध निदेशक बदलने के कारण एक बार फिर नए सिरे से इन मुद्दों पर चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा।
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विद्युत उत्पादन कंपनी के प्रबंध निदेशक का पद संभालने के बाद राजेश वर्मा ने सभी यूनियन प्रतिनिधियों के साथ श्रमिक समस्याओं पर चर्चा कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था। इसके साथ ही कर्मियों में उम्मीद बंध गई थी कि पद रि.स्ट्रक्चर करने के बाद पदोन्नति का रास्ता खुल जाएगा। कंपनी ने अभी इस मुद्दे पर तैयारी भी उचित ढंग से शुरू नहीं की थी कि एक माह के भीतर एमडी वर्मा ने अपने पद से इस्तीफ ा दे दिया। उनके स्थान पर कार्यपालक निदेशक एनके बिजौरा को नया एमडी बनाया गया है। अब एक बार फि र नए सिरे से कर्मियों के पद रि-स्ट्रक्चर मामले में श्रमिक संघ प्रतिनिधि प्रस्ताव रखेंगे और प्रबंधन से चर्चा कर लागू कराने का प्रयास होगा। इसके साथ ही कर्मियों की पदोन्नति पर भी मंथन के उपरांत निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। कर्मियों का कहना है कि अफ सरों का पद रि-स्ट्रक्चर हुए छह माह का वक्त बीत चुका है और इस दौरान सभी अफ सरों को पदोन्नति मिल चुकी है, लेकिन कर्मियों के मामले में टालमटोल की नीति अख्तियार की जा रही है। इससे कर्मियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। प्रत्येक माह कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उन्हें पदोन्नति नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही उत्पादन कंपनी के आय-व्यय का खुलासा करने हेतु रिपोर्ट कार्ड जारी करने, भू.विस्थापित कर्मियों को रेग्युलर करने तथा शेष भू.विस्थापितों को पात्रता अनुरूप जल्द नौकरी देने का मामला भी लटक गया है। इसी तरह कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने, कर्मचारियों के रिक्त पदों पर नई भर्ती, पदोन्नति से भरे जाने वाले पद पर सीधी भर्ती बंद करने, कॉलोनी परिसर में रिक्त दुकानों को सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पुत्र-पुत्रियों को व्यवसाय हेतु आवंटित करने एवं दुकानों की अवैध खरीदी-बिक्री बंद करने, कॉलोनी परिसर में अवैध निर्माण हटाने एवं वर्ष 2011 में पदस्थ कार्यालयीन सहायक श्रेणी.तीन संविदा एवं भू.विस्थापित के नियमितीकरण में समानता प्रदान करने का मामला रुक गया। प्रत्येक उत्पादन संयंत्रों का मासिक उत्पादन के आधार पर निजी कंपनियों की तरह आय-व्यय विवरण तैयार करने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है।







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