शशि थरूर ने अमित शाह के बंटवारे को लेकर दिए बयान पर कसा तंज , कहा-इतिहास की क्लास में नहीं दिया ध्याान
मुंबई, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने बंटवारे को लेकर संसद में दिए गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि अमित शाह ने इतिहास की क्लास में ध्यान से पढ़ाई नहीं की. उन्हें पता होना चाहिए कि कांग्रेस ने नहीं बल्कि हिंदू महासभा ने दो राष्ट्र के सिद्धांत का समर्थन किया था.' बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल 2019 पर लोकसभा में चर्चा के दौरान सोमवार को कहा था कि अगर कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का बंटवारा नहीं किया होता तो आज हमें ये नहीं करना पड़ता.
'सभी के लिए मुक्त भारत का निर्माण करना चाहिए'
थरूर ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक देश के संविधान पर हमला है. हमें सभी के लिए मुक्त भारत का निर्माण करना चाहिए. हम देश को धर्म के आधार पर नहीं बांट सकते. उन्होंने विधेयक को लोकसभा में पेश किए जाने से पहले भी कहा था कि धर्म के आधार पर राष्ट्रीयता को तय करना पाकिस्तान का तरीका है. इस विधेयक में सिर्फ छह धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता प्राप्त करने का प्रावधान किया गया है. बाकी धर्मों को विधेयक में बाहर कर दिया गया है. यह धर्म के आधार पर भेदभाव है.
विपक्ष संसद के अंदर और बाहर कर रहा है विरोध
अमित शाह ने विधेयक पर चर्चा के दौरान सोमवार को कहा था कि हमें आज इस बिल की जरूरत क्यों पड़ी? अगर आजादी के बाद कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का बंटवारा नहीं किया होता तो हमें आज इस विधेयक की जरूरत ही नहीं पड़ती. कांग्रेस ने ही धर्म के आधार पर देश का बंटवारा किया था. इससे पहले कांग्रेस सांसदों ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा था कि प्रस्तावित कानून मुस्लिमों के खिलाफ है, जो संविधान में दिए गए समानता के अधिकार के खिलाफ है. संसद और देश के विभिन्न शहरों में विरोध कर रहे विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि विधेयक भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान का उल्लंघन करता है.
बीजेपी के चुनाव घोषणापत्र में शामिल था विधेयक
बीजेपी का कहना है कि हमने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अपने घोषणापत्र में नागरिकता संशोधन बिल को शामिल किया था. ऐसे में इस विधेयक को संसद में पेश करना जरूरी था. बीजेपी के लिए जरूरी है कि इसे दोनों सदनों से पारित कराकर कानून बनाए. बीजेपी का कहना है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों का धर्म के आधार पर उत्पीड़न किया जा रहा है. इस विधेयक के कानून बनने के बाद इन तीनों देशों के अल्पसंख्यक धार्मिक उत्पीड़न के आधार पर भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर पाएंगे.







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