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अजब-गजब: चूहों के शुक्राणुओं से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पैदा हुए 'Space Mouse'

अजब-गजब: चूहों के शुक्राणुओं से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पैदा हुए 'Space Mouse'
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इंटरनेशल स्पेस स्टेशन में 168 विशेष नस्ल के चूहों के बच्चे एक कड़ी प्रक्रिया के बाद पैदा किए गए हैं. चूहों के शुक्राणुओं को इंटरनेशल स्पेस स्टेशन में फ्रीज-ड्राएड फार्म में स्टोर किया गया. इनको फिर वापस धरती पर लाकर रिहाइड्रेटिड किया गया जिसके फलस्वरूप अच्छी खासी संख्या में चूहों के बच्चे पैदा किए गए और खासियत ये है कि ये सभी जेनेटिक कमियों से मुक्त है.


जापानी शोधकर्ताओं ने की है कड़ी मशक्कत


जापानी शोधकर्ताओं ने चूहों से लिए गए शुक्राणुओं को उच्च लेवल कॉस्मिक रेडिएशन पर लगभग छ साल तक एक्सपोज किया. इसी जटिल प्रक्रिया से चूहों के बच्चों की एक बड़ी और स्वस्थ संख्या पैदा की जा सकी. इस प्रक्रिया में जिस शोध का सहारा लिया गया उसे शुक्रवार को प्रकाशित किया गया. डेवलपमेंट बॉयोलॉजिस्ट तेरूहिको वॉयकामा के मुताबिक स्पेस में स्टोर किए गए शुक्राणु से पैदा होने वाले चूहों के बच्चों और धऱती पर मिलने वाले चूहों में मामूली से अंतर है.


चूहें स्वस्थ, जेनेटिकली भी कोई समस्या भी नहीं


धरती से लिए गए शुक्राणु को स्पेस स्टेशन पर स्टोर किया गया इसके बावजूद पैदा हुए ‘पप्स’ में कोई जेनेटिकली समस्या नहीं है. वॉयकामा और उनके साथी शोधकर्ताओं ने 2013 में जापान की यामांशी यूनिवर्सिटी में तीन बॉक्स लॉंच किए थे और हर एक में फ्रीज-ड्रायड शुक्राणु के 48 एम्पियूल्स रखे गए थे. इनको एक लंबी स्टडी के लिए रखा गया था. ऐसा करके वो ये देखना चाहते थे कि स्पेस में शुक्राणुओं पर रेडिएशन की प्रक्रिया करने पर इनके डीएनए या रिप्रोडक्टिव सेल में कोई बदलाव या डेमेज तो नहीं होता. इस प्रक्रिया में शामिल बैच धरती पर फर्टीलाईजेशन के लिए स्पेस स्टेशन से पहले 9 महीने में लौटे फिर दो साल बाद और फिर अंत में छ साल बाद और नतीजा आपके सामने है कि इतनी बड़ी संख्या में माऊस पप्स पैदा किए गए.


अगली बार इस तरह होगा रिप्रोडक्शऩ


जानकारी दी गई कि जब ये चूहे के बच्चे बड़े हो जाएंगे तो इनसे रेनडम निशेचन की प्रक्रिया कराई जाएगी और इससे अगली जेनेरेशन भी सामान्य रूप से जन्म लेगी. जिन एम्प्यूल्स को बॉक्स में रखा गया था वो साइज में काफी छोटे और हल्के थे जिससे प्रक्रिया की लागत को भी कम किया गया. वॉयकामा अब एडवांस्ड बॉयोटेक्नोलॉजी सेंटर के डायेरक्टर हैं और उन्होंने आगे कहा कि वो उस साइंस फिक्शन से प्रेरित हुए जो हेनलीन और असीमोव से जुड़ा था और ये दोनो ही एस्ट्रोनॉट बनना चाहते थे. वॉयकामा ने कहा कि “भविष्य में जब कभी धऱती के अलावा दूसरे ग्रह पर जाने का समय आएगा तो हमें मानव जाति के साथ जानवरों और पालतू जानवरों जेनेटिक रिसोर्स को भी मेनटेन करना होगा.

 


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