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सबरीमाला मंदिर के खिलाफ दायर याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बेंच को भेजा मामला, 7 जजों की बेंच करेगी इस मामले की सुनवाई

 सबरीमाला मंदिर के खिलाफ दायर याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बेंच को भेजा मामला, 7 जजों की बेंच करेगी इस मामले की सुनवाई
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केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को बड़ी बेंच को भेज दिया है। आज इस मामले में दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा हमने मामले में नई याचिकाओं को सुना और सभी में धर्म का हवाला दिया गया। कोर्ट ने अपने फैसले में इस पूरे मामले को अब बड़ी बेंच को भेज दिया है जिसके बाद अब 7 जजों की बेंच इस मामले में सुनवाई करेगी। फिलहाल पांच जजों की बेंच में से तीन जजों ने इसे बड़ी बेंच को भेजने की वकालत की वहीं दो जज कोर्ट के पुराने फैसले पर बने रहने के पक्ष में थे। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि उसके द्वारा 28 सितंबर 2018 को सुनाए गए फैसला अब भी लागू रहेगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह राज्य सरकार पर निर्भर है कि वो इसको लागू करे या नहीं। 
पिछले साल सितंबर में इस फैसले के खिलाफ याचिकाएं दायर हुई थीं जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने इस साल फरवरी में सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सबरीमाला के अयप्पा मंदिर में 17 तारीख से यात्रा शुरू हो रही है और उससे पहले सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।
भगवान अयप्पा के मंदिर में इसी रविवार से शुरू होने वाले दो माह के त्योहार की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसके चलते केरल पुलिस ने मंदिर परिसर समेत पूरे शहर में सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ 28 सितंबर, 2018 के फैसले के पश्चात हुए हिंसक विरोध के बाद 56 पुनर्विचार याचिकाओं सहित कुल 65 याचिकाओं पर फैसला सुनाएगी। संविधान पीठ ने इन याचिकाओं पर इस साल छह फरवरी को सुनवाई पूरी की थी और कहा था कि इन पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा।
इन याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली संविधान पीठ के सदस्यों में जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस धनंजय वाई. चंद्रचू़ड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल हैं। सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं का प्रवेश वर्जित होने संबंधी व्यवस्था को असंवैधानिक और लैंगिक तौर पर पक्षपातपूर्ण करार देते हुए 28 सितंबर, 2018 को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से फैसला सुनाया था। इस पीठ की एकमात्र महिला सदस्य जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने अल्पमत का फैसला सुनाया था। केरल में इस फैसले को लेकर बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध होने के बाद दायर याचिकाओं पर संविधान पीठ ने खुली अदालत में सुनवाई की थी। याचिका दायर करने वालों में नायर सर्विस सोसाइटी, मंदिर के तांत्री, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड और राज्य सरकार भी शामिल थीं।
त्रावणकोर बोर्ड ने किया था फैसले का समर्थन
सबरीमाला मंदिर की व्यवस्था देखने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने अपने रुख से पलटते हुए मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने की न्यायालय की व्यवस्था का समर्थन किया था। बोर्ड ने केरल सरकार के साथ मिलकर संविधान पीठ के इस फैसले पर पुनर्विचार का विरोध किया था। बोर्ड ने बाद में सफाई दी थी कि उसके दृष्टिकोण में बदलाव किसी राजनीतिक दबाव की वजह से नहीं आया है।
कुछ दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बोर्ड ने केरल में सत्तारूढ़ वाममोर्चा सरकार के दबाव में न्यायालय में अपना रुख बदला है। इस मसले पर केरल सरकार ने भी पुनर्विचार याचिकाओं को अस्वीकार करने का अनुरोध किया।
रविवार से दो माह के लिए खुलेगा मंदि
केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर नए सत्र में आगामी 17 नवंबर से खुल रहा है और अगले साल 21 जनवरी को बंद होगा। पिछले साल के विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए राज्य की पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहती है। पुलिस ने दो महीने के मंदिर के कार्यक्रम को चार खंडों में विभाजित किया है। पहले दो हफ्ते 15 नवंबर से शुरू होंगे और 29 नवंबर तक चलेंगे। इस दौरान मंदिर परिसर में 2,551 पुलिस अधिकारी तैनात होंगे। जबकि 30 नवंबर से 14 दिसंबर तक 2,539 अधिकारी, तीसरे चरण में 15 से 29 दिसंबर के बीच 2,992 अफसर और चौथे चरण में 30 दिसंबर से 3,077 पुलिस अफसर सुरक्षा प्रबंध देखेंगे। राज्य के अतिरिक्त डीजी शेख दरवेश साहिब की निगरानी में सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। इस ड्यूटी रोस्टर में 24 एसपी व एएसपी, 112 डीएसपी, 264 इंस्पेक्टर, 1185 एएसआई, 8402 सिविल पुलिस अधिकारी होंगे।

 


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