जिंदल स्कूल के मोटीवेशन प्रोग्राम में मुख्यवक्ता के रूप में शामिल हुए सुशील रामदास, जाने पूरी खबर
रायगढ़ । नगर के ओ.पी.जिंदल स्कूल ने बच्चों को प्रतोसहित करने के लिए जिंदल ऑडिटोरियम में एक मोटिवेसन प्रोग्राम का आयोजन किया था।जिसमें पहली से पाँचवी तक के 1 हजार से अधिक बच्चें शामिल हुए।इस प्रोग्राम में मुख्यवक्ता के रूप में समाजसेवी सुशील रामदास अग्रवाल को आमंत्रित किया गया था। सुशील रामदास की स्पीच की बच्चों के साथ-साथ जिंदल स्कूल के अध्यापक और अध्यापिकाओं ने भी काफी सराहना की।इस अवसर पर बच्चों के साथ बड़ी संख्या में जिंदल स्कूल के शिक्षकगण उपस्थित थे।
समाजसेवी सुशील रामदास ने अपने उद्बोधन में बच्चो को जीवन मे सफल होने तरीका समझाया।उन्होंने कहा कि आप का अधिकांश समय स्कूल में गुजरता है क्लास में कोई बच्चा होशियार तो कोई कमजोर होता है ये स्वाभाविक है।आप को क्लास में होशियार होंना है आगे बढऩा है तो कही मत जाइए अपने की पाठशाला में होशियार बच्चे का अनुसरण करें उसके अनुसरण से आप को दिमाग पढ़ाई में लगेगा और मन मे उसके जैसे बनने की जिज्ञासा होगी और जिस दिन आप के मन मे होशियार बनने की जिज्ञासा जाग गयी आप को अव्वल आने से कोई नहीं रोक सकता है।
मम्मी या परिजन जो दे वही खाये जगफूड से दूर रहे - सुशील रामदास
कार्यक्रम में सुशील ने की आप की मम्मी आप को जो खाने बोलती है आप वही खाये मम्मी आप को दो टाइम दूध पीने बोलती है तो आप पिये।इससे आप सही शारीरिक और मानसिक विकास होगा।आजकल आप विदेशी सभ्यता में उलझते जारहे है।ये फास्ट फूड और जग फूड जैसे पिक्ज,बरगर,नूडल आदी का ज्यादा सेवन आप के सही विकास में बाधा बन रहा है। अगर आपको अपना सही विकास करना है और एक स्वास्थ्य इंसान बनना है तो आप के माता-पिता जो जो खाने बोले वही खाइए और फास्टफूड से दूरी बनाये।
मोबाइल को आप मत देखो लोग आप को मोबाइल पर देखें कुछ ऐसा करो
सुशील रामदास ने आज कल बच्चें जो मोबाइल में लगे रहते है उसको हानिकारक बताते हुए बच्चों को समझाया कि जैसा आजकल आप मोबाईल, टी.वी को में ज्यादा समय देते है।हमें मोबाइल को नहीं देखना चईये आप कुछ ऐसा कीजिये अपनी सख्शियत को ऐसा बनाइये की जिससे लोग आप को मोबाइल ,टीवी पर देखे। मोबाइल से हमारी आँखे भी कमजोर होती हैं।मोबाइल के कारण आजकल सबसे बड़ी दिक्कत बच्चो के लिए की वे शारीरक खेलो से दूर होते जारहे है जो आप को आलसी बनाता है। इस लिए शारीरिक शक्ति को बनाये रखने के लिए खेलेकूदे,कसरथ करे इससे आप को पढ़ाई करने में भी आनंद आएगा और आप को चहुँमुखी विकास होगा। इस लिए आप मोबाइल को नहीं लोग आप को मोबाइल पर देखे ऐसे बनिये।
पहला स्कूल आप का घर माता पिता होते है जहाँ से आप को संस्कार मिलता है
अपने उद्बोधन में श्री सुशील रामदास ने कहा कि आप का पहला विद्यालय या स्कूल या कहा जाए आप के पहले गुरु या टीचर आप के मम्मी पापा है उनसे आप को संस्कार मिलता है।घर मे अपने परिजनों के साथ रहने से बड़ो से बातचीत,उनका सम्मान करने का हम तरीका सीखते है।उठने-बैठने,मान-सम्मान की सिख हमें अपने घर से अपने माता पिता से मिलता है और ये संस्कार ही होता है जो आप का आगे चल कर स्कूल में या समाज मे चरित्र का प्रमाण पत्र बनता है।







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