नेपाल-तिब्बत सीमा की बाढ़ में भाजपा नेता की बेटी समेत छत्तीसगढ़ की तीन महिलाएं लापता    |    बहनों का स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल : मुख्यमंत्री साय    |    लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |

गरमाने लगा है नगरनार स्टील प्लांट निजीकरण का मुद्दा, जाने पूरी खबर

गरमाने लगा है नगरनार स्टील प्लांट निजीकरण का मुद्दा, जाने पूरी खबर
Share

जगदलपुर | नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण किये जाने को लेकर अब विरोध शुरू हो गया है। 2001 में नगरनार स्टील प्लांट के लिए प्रभावितों ने अपनी जमीन प्लांट के लिये दी थी। प्लांट के तैयार होने से पहले ही केंद्र सरकार ने इसके निजीकरण का फैसला ले लिया है। केंद्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के बाद नगरनार के प्रभावितों और आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण लामबंद हो गए है और चरण बद्ध तरीके से इसका विरोध भी शुरू कर दिया है। आज नगरनार बाजार में सभी प्रभावितों और कर्मचारी संगठन ने जन जागरण रैली निकाली औऱ केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की है कि केंद्र सरकार उस निर्णय को तत्काल वापस ले नहीं तो पूरे बस्तर में इसका विरोध किया जाएगा। वहीं आज जन जागरण रैली में कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी सहित नगरनार क्षेत्र के कांग्रेस के पदाधिकारी मौजूद रहे। ज्ञात हो कि यह बस्तर के राजनीति का एक अहम मुद्दा रहा है। जिसे लेकर स्थानीय भाजपा नेता भी निजीकरण का विरोध करते रहे हैं। इस संबंध में भाजपाईयों ने केंद्र की सरकार से एनएमडीसी का निजीकरण नहीं करने के लिए पहल शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में नगरनार के निजीकरण का मुद्दा और गरमायेगा। इसके साथ यह बड़ा चुनावी मुद्दा भी बनेगा, लेकिन आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ में चुनावी मौसम लगभग समाप्त हो चुका होगा। इस दौरान यह मुद्दा कितनी मजबूती के साथ कौन उठायेगा यह आने वाला समय ही बतलायेगा। 

 

Share

Leave a Reply