स्क्रैप की आड़ में संयंत्रों-उपक्रमों से चोरी
कोरबा। पुलिस प्रशासन द्वारा रोक लगाने के बाद भी जिले में अवैध कबाड़ का व्यवसाय जिस तरीके से जारी रखा गया है उससे कहीं ना कहीं पुलिस की छवि पर सवालिया निशान लग रहे है। विभिन्न थाना क्षेत्रों में कुछ माह के भीतर जिस प्रकार बड़े वाहनों के माध्यम से अन्यंत्र खपाने ले जाते अवैध कबाड़ पकड़ा गया है उससे जाहिर है कि धंधे पर रोक लगाने के फरमान के बाद किसी तरह का लगाम नही लग पाया है। पाली नगर में भी कबाड़ का अवैध गोरखधंधा शातिराना तरीके से संचालित हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार पाली नगर में अवैध कबाड़ का व्यवसाय शातिराना तरीके से संचालित है। जहां घरों से निकलने वाला प्लास्टिक व लोहा-टीन सहित स्क्रैप सामानों के साथ जिले में संचालित विभिन्न संयंत्रों एवं कोयला खदानों से चोरी का कबाड़ को नगर के लगने वाले साप्ताहिक बाजार के पास एकत्र कर चार पहिया वाहन के माध्यम से आधी रात अन्यंत्र भेजा जाता है। यह अवैध धंधा जिस प्रकार संचालित हो रहा है, वह अन्य किसी के संज्ञान में नही आ पाया है। महज दिखावा स्वरूप घरों से निकलने वाले लोहा-टीन व प्लास्टिक स्क्रैप को बाहर रखा जाता है जबकि संयंत्रों एवं उपक्रमों से चोरी किया गया कबाड़ छुपाकर रखा जाता है, जिसे रात में चार पहिया वाहन में भरकर बाहर खपाया जाता है। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमरेश मिश्रा द्वारा अपने कार्यकाल में कबाडिय़ों पर गिराए गए गाज के दौरान जिले के सभी कबाड़ी दुबक गए थे। उनके स्थान्तरण के बाद उक्त अवैध धंधे की सुगबुगाहट पुन: दिखाई देने लगी जो धीरे.धीरे कर वृहद् रूप से अपना पाँव पसारती जा रही है। वर्तमान समय में कबाड़ का जो धंधा नगर में संचालित हो रहा है उसमें स्थानीय कुछ नए चेहरों ने जन्म लिया है जो नीचे से ऊपर तक सेटिंग की बात कहते फिर रहे हैै।
जिले में अवैध कबाड़ व्यवसाय पर धरपकड़ को लेकर एक बात सोचनीय है कि पुलिस ने जब भी कार्यवाही की अन्यंत्र खपाने ले जाते हुए वाहन में भरा कबाड़ ही पकड़ा जबकि उन कार्यवाही में कबाड़ के ठिकाने पर दबिश की कार्यवाही देखने सुनने को नही मिल पायी है। वहीं पुलिस द्वारा पकडे गए कबाड़ का आसानी से बिल पेश कर कबाडिय़ों द्वारा सुपुर्दनामा ले लिया जाता है। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब जिले में कबाड़ के धंधे पर ही पूर्णत: रोक है फिर किस उपक्रम व संयंत्र से निविदा-नीलामी के रूप में स्क्रैप खरीदी किया जाता है जिसका बिल पेश कर जब्त कबाड़ सुपुर्दनामे की औपचारिता निभाई जाती है, यही कारण है कि संयंत्रों व खदानों में चोरी जैसी गतिविधियों पर विराम नही लग पा रहा है।







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