बिजली कंपनियों को भारी मात्रा में हुआ नुकसान, जाने कितना...
भोपाल : मध्यप्रदेश में घाटे में चल रही विद्युत वितरण कंपनियों को वास्तविकता कैग (भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट में सामने आई है। यह रिपोर्ट मंगलवार को विधानसभा में पेश हुई। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018-19 के दौरान तीनों (पूर्व, पश्चिम और मध्य) विद्युत वितरण कम्पनियों में 7158.48 करोड़ रुपये नुकसान का आंकलन किया गया। हालांकि, इस दौरान मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी, पावर ट्रांसमिशन कंपनी और बाणसागर थर्मल पावर कंपनी 216.80 करोड़ रुपये के फायदे में रही है। प्रदेश में कोयला संकट बरकरार है। पावर जनरेटिंग कंपनी एक बार फिर बिजली के दाम बढ़ाने की तैयारी मर रही है और आधार विद्युत वितरण कंपनियों की माली हालत को बताया जा रहा है। कंपनियों की स्थिति कैग की रिपोर्ट से भी पत चलती है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018-19 में ऊर्जा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों का कारोबार 77 हजार 617.28 करोड़ रुपये था जो मध्य क्षेत्र के सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 9.59 प्रतिशत था। इन उपक्रमों में कुल निवेश का वर्तमान मूल्य 87 हजार 154.15 करोड़ रुपये था। वर्ष 2016-17 में एक हजार 405.93 करोड़ के मुकाबले वर्ष 2018-19 में छह हजार 944.74 करोड़ का नुकसान उठाया गया। इस साल 11 में से तीन उपक्रम लाभ ले रहे, जबकि विद्युत वितरण कंपनियां सात हजार 158.48 करोड़ के घाटे में चली गई। कैग की रिपोर्र्ट में कहा गया है कि मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने 452.32 करोड़ रुपये के 155 ट्रांसफार्मर खरीदने के लिए 19 ठैके किण्द्ध इसमें कंपनी किफायदी खरीद नहीं कर सकी। पिछली खरीद की तुलना में समान क्षमता के ट्रांसफार्मर उच्च मूल्य पर खरीदे गए। कंपनी दूसरे बोलीदार से पहली बोली पर की गई खरीद की दर को प्रतिबंधित करने में भी विफल रही।







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