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पूरे देश में होगी मतदाता सूची की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘घुसपैठियों’ को बाहर करने की तैयारी

पूरे देश में होगी मतदाता सूची की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘घुसपैठियों’ को बाहर करने की तैयारी
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 नई दिल्ली: आने वाले महीनों में देश की मतदाता सूचियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चुनाव आयोग (ECI) ने पूरे भारत में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य अवैध विदेशी प्रवासियों को मतदाता सूची से हटाना और एक त्रुटिरहित, पारदर्शी सूची तैयार करना है।

क्यों है यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’?

इस अभियान की अहमियत उन राज्यों में और बढ़ जाती है जहाँ अवैध प्रवासियों, खासकर बांग्लादेश और म्यांमार से आने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। आयोग का कहना है कि यह कदम उसके संवैधानिक दायित्व का हिस्सा है ताकि मतदाता सूची की शुद्धता और अखंडता बनी रहे।

चुनाव अधिकारी हर घर जाकर मतदाताओं की जानकारी का क्रॉस-चेक करेंगे। नए मतदाता और किसी अन्य राज्य से स्थानांतरित होने वाले लोगों के लिए एक नया फॉर्म लागू किया गया है। इसमें उन्हें प्रमाणित करना होगा कि उनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में हुआ था। यदि जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ है, तो उन्हें माता-पिता के जन्म से संबंधित दस्तावेज भी जमा करने होंगे।
इस कदम की आलोचना भी हो रही है। विपक्षी दलों का दावा है कि लाखों योग्य भारतीय, जिनके पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है और चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से छूट न जाए। चुनाव आयोग के लिए यह चुनौती दोहरे पक्ष वाली है—एक ओर अवैध प्रवासियों को सूची से बाहर करना, वहीं दूसरी ओर भारतीय नागरिकों के मताधिकार को सुरक्षित रखना।
ECI की योजना है कि यह गहन पुनरीक्षण इस साल के अंत तक शुरू हो सकता है। इसे 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों (असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल) से पहले लागू किया जाएगा। विशेष गहन पुनरीक्षण न सिर्फ अवैध प्रवासियों की पहचान करेगा, बल्कि चुनावों में मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


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