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तीन दिवसीय भक्ति योग वेदांत सम्मेलन का हुआ आयोजन

तीन दिवसीय भक्ति योग वेदांत सम्मेलन का हुआ आयोजन
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भक्ति योग वेदांत सम्मेलन तीन दिवसीय आज युगपुरुष स्वामी के द्वारा अपने ओजस्वी वाणी से गुरु तेग बहादुर भवन में लगभग 5०० श्रोतागढ़ को अमृतवाणी से समापन के अवसर पर महामंडलेश्वर अनंत श्री विभूषित युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरि जी के मुखारविंद में आज

काल के माथे पग धरु
सतगुरु के उपदेश ना घर छोड़ो छोड़ो ना घर भूलो ऐसे रहो इस जंगल में जैसे रहता पानी कमल में कर्तव्य करो कर्म करो जैसे श्रीकृष्ण से अर्जुन को उपदेश दिया कर्तव्य तुम ईमानदारी में करो नारगी मंच संसार एक नाटकीय मंच है गुरु अपना रोल कर रहे हैं शिष्य अपना रोल करें जहां है कर्तव्य वही कर्तव्य कर्म करते हुए जगत विश्व शिव सदा है सत्य सत्य ही शिव है वही सुंदर
कॉल कर्मा मिथ्या दोष लगाएं अच्छाई बुराई वाला समय ईश्वर का ध्यान करें ना दुकान छोड़ो ना घर छोड़े कर्तव्य कर्म करें देखो मैं देह को मारना ही सबसे बड़ा पाप है आदि शंकराचार्य जी बोले है
दुख को अगर हम मेहमान मान लेंगे हानि हानि नहीं रहेगी स्वीकार न करने से दुख नहीं जाएगा बुढ़ापा नहीं मानने से नहीं आएगा
महामंडलेश्वर अनंत श्री विभूषित युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज अखंड परम धाम हरिद्वार
हमारा किया हुआ कर्मा हमें भोगना मैंने किया वह मेरे हिस्से में रहेगा कथा से कल्याण होगा वहां भी होगा
इस जन्म परमात्मा प्रसन्ना होते हैं तो संत से मिला देते हैं परमात्मा दुखी हो तो संसार दे देते हैं मैं हृदय में रहता हूं मंदिर में भी रहता हूं हृदय में भी रहता हूं तो मेरी चलती है मंदिर में पुजारी की चलती अविनाशी है अजन्मा है इसको जानने के लिए कथा है संसार सब जानते हैं विनाशिनी अविनाशी जो आज तक सोया नहीं वाह जागेगा कैसे
आध्यात्मिक कथा व्यास महामंडलेश्वर श्री स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी के मुख से
जो तुलना ना करें सन्यासी जो तुलना करें गृहणी
इंद्र कहे ब्रह्मा सुखी ब्रह्मा कहे विष्णु सुखी तुलसीदास का है हरि भजन बिन सब
हमारी समझ बदल बदल जाए दृष्टि बदल जाए यह संतोष सबके लिए नहीं अभाव है वह कर्म करें तुलना वाला अभाव तुलना विहीन होना ही सुखी होना है
अगर गणित भूल जाओ जोड़ना घटाना
गरीब आदमी रोटी खा लेता है और कुछ नहीं चाहता
आय से व्यय जादा हो तो गरीबी होती है
उतना पाव पसारे आवश्यकता काम करो आनंद में रहो
आयोजक :अखंड परम धाम सेवा समिति रायपुर छत्तीसगढ़


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