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वायरस का नया वेरिएंट आने के बाद भी प्रभावी रहेगा वैक्सीन: विश्व स्वास्थ्य संगठन

वायरस का नया वेरिएंट आने के बाद भी प्रभावी रहेगा वैक्सीन: विश्व स्वास्थ्य संगठन
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नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार वर्तमान में कोविड-19 की जो भी वैक्सीन विकसित की जा रही हैं, वे वायरस के नए वेरिएंट्स के खिलाफ भी न्यूनतम सुरक्षा अवश्य देंगी। ये वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी और कोशिकाओं की शाृंखला से एक बड़ा इम्यून रिस्पांस तैयार करती हैं। इसलिए वायरस में कोई भी बदलाव या म्यूटेशन वैक्सीन को पूरी तरह निष्प्रभावी नहीं कर सकता।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार नए स्ट्रेन पर प्रभावी क्षमता बढ़ाने के लिए इन वैक्सीन के कंपोजिशन में कुछ बदलाव कर इन्हें अपग्रेड करना पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन अभी सभी नए स्ट्रेन का डाटा लेकर उनके व्यवहार का अध्ययन कर रहा है। स्वास्थ्य अधिकारी और वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं इनका वैक्सीन की प्रभावी क्षमता पर क्या प्रभाव है। यह प्रभाव अलग-अलग वैक्सीन पर अलग-अलग हो सकता है।

म्यूटेशन से निपटने की रणनीति
डब्ल्यूएचओ के अनुसार वायरस के म्यूटेशन से निपटने के लिए कई तरीके अपनाए जा सकते हैं। पहला तो यह है कि वायरस के संभावित बदलावों को ध्यान में रखकर ही वैक्सीन बनाए और अपग्रेड किए जाएं। दूसरा वैक्सीन एक से ज्यादा स्ट्रेन के लिए बनाए जाएं तीसरा बदलाव के अनुसार बूस्टर टीका अलग से दिया जाए। इसके अलावा अगर जरूरी हो तो वैक्सीन में ही बदलाव किया जाए।

वायरस को बदलने से हम कैसे रोक सकते हैं
अगर वायरस का प्रसार रोक दिया जाए तो उसका म्यूटेशन यानी बदलाव भी रुक जाएगा। यह मुख्य कुंजी है। इसके लिए समय-समय पर हाथ धोते रहें। मास्क पहने रहें। सामाजिक दूरी बनाए रखें। वेंटिलेशन सही रखें। भीड़ भरी जगहों और बंद कमरों में अन्य लोगों के साथ बैठक करने से बचें। संक्रमण प्रसार को रोकने के लिए लगातार काम करने की जरूरत है।

क्या है एस्केप म्यूटेशन
सार्स-कोव-2 के अफ्रीकी स्ट्रेन में वायरस ने स्पाइक का एक महत्वपूर्ण प्रोटीन ही बदल लिया है। यह बदला हुआ प्रोटीन ई484के है, इसे वैक्सन से बनी एंटीबॉडी आसानी से नहीं पहचान पा रही। इसलिए इसे एस्केप म्यूटेशन कहा जा रहा है। समझा जा रहा है कि भारत में मिले डबल म्यूटेंट स्ट्रेन में भी स्पाइक की एक प्रोटीन ई484आर भी एस्केप म्यूटेशन बताया जा रहा है।

नए वेरिएंट आने पर टीका कितना महत्वपूर्ण
डब्ल्यूएचओ के अनुसार कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में टीका ही मुख्य हथियार है और यह इसमें जीवन रक्षक की भूमिका निभा सकता है। इस लिए वैक्सीन लेने से न चूकें।
चीन में सिनोवैक कंपी की कोरोना वैक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है। इसका बहुत ही कम डाटा सार्वजनिक किया गया है। इसे परंपरागत तरीके से डिजाइन किया गया है, जिसमें वायरस का एक इनएक्टिव हिस्सा इस्तेमाल कर शरीर के इम्यून रिस्पोंस को सक्रिय किया जाता है। चीन से बाहर ब्राजील, इंडोनेशिया और तुर्की में भी कोरोना वैक का तीसरे चरण का ट्रायल हुआ। तुर्की में इसकी प्रभावी क्षमता 83.5 तो ब्राजील में सिर्फ 50.7 प्रतिशत ही रिपोर्ट हुई। हालांकि दो डोज में अंतर बढ़ाकर इस प्रभावी क्षमता को 62.3 प्रतिशत तक हांसिल किया गया।
 


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