Video: महिला दिवस के अवसर पर एक शानदार दिल छू लेने वाली कविता युवा कवि आशीष की जुबानी
महिलाएँ, माँ, बेटी,बहू, बहन,बुआ न जाने कितने रिश्तों को सींचने का काम उम्र भर करती हैं...हर रिश्ते को निभाने की कला और शक्ति इनको ही प्राप्त है.... लेकिन हमेशा दबी,सहमी, सकुचाई सी रहती हैं... हक़ और शक़ के बीच गुम हो जाती हैं... एक दिवस में इनको समेट नहीं सकते... हर दिन,हर पल इनके आभारी रहें!!! आप सभी को महिला दिवस की बधाई!!!!
आशीष ठाकुर (अकेला)







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