मौसम अलर्ट: उत्तर-पूर्वी मानसून की आहट से इन राज्यों पर मंडराया बारिश का खतरा
नई दिल्ली: मानसून की विदाई के साथ ही उत्तर भारत में मौसम बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई है। इसका असर मैदानी इलाकों में भी देखा जा रहा है। धीरे-धीरे ही सही ठंड ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। इस बीच दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून आहट देने लगी है।
इस मानसून की वजह से देश के दक्षिणी राज्यों में बारिश होती रहेंगी। मौसम विभाग ने बताया है कि शुरुआत में यह मानसून कमजोर रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक देश के दक्षिणी इलाकों को छोड़ किसी भी राज्य में बारिश की संभावना न के बराबर है।
पूर्वी मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। जबकि एक ट्रफ रेखा तमिलनाडु तक फैली हुई है। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले 48 घंटों में पूर्वी मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। मौसम विभाग ने जानकारी दी कि तमिलनाडु और केरल में अगले चार दिन के दौरान बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग के मुताबिक 30 अक्टूबर तक तमिलनाडु, पुड्डुचेरी और केरल में सामान्य से भारी बारिश की संभावना है। दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और रायलसीमा में 29 और 30 अक्टूबर को जबकि तटीय आंध्र प्रदेश में 28 से 30 अक्टूबर के बीच भारी बारिश के आसार हैं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, केरल, माहे, तटीय और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी में 30 अक्टूबर तक गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। गरज-चमक के साथ तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भी बादल बरसेंगे।
वहीं, मौसम विभाग ने अपने अपडेट में बताया कि अभी पश्चिम विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की स्थिति जम्मू् कश्मीेर के पास बनी हुई है।
मौसम विभाग ने सोमवार को कहा कि इस साल मानसून ने 46 साल में सातवीं बार सबसे देरी से वापसी है। हालांकि दक्षिणपूर्व बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती दबाव विकसित हो रहा है जिससे एकबार फिर मौसम के बेपटरी होने की आशंका है।
मौसम विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सोमवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पूरे देश से वापसी कर ली। सन 1975 के बाद से ऐसा सातवीं बार हुआ है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देर से वापसी की है। हालांकि दक्षिणपूर्व बंगाल की खाड़ी एवं आस-पास के इलाकों में मंगलवार तक एक चक्रवाती परिसंचरण के विकसित होने की संभावना है। इसके पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके चलते अगले 48 घंटों के दौरान दक्षिण बंगाल की खाड़ी के मध्य भागों में एक कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है।







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