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क्या है सेक्स सरोगेट थेरेपी, जो इजरायल अपने घायल सैनिकों को उपलब्ध करा रहा है?

 क्या है सेक्स सरोगेट थेरेपी, जो इजरायल अपने घायल सैनिकों को उपलब्ध करा रहा है?
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इजराइल में सैनिकों को सेक्स सरोगेट थैरेपी देने की बात चर्चा में है. दरअसल बुरी तरह से घायल और आत्मविश्वास खो चुके सैनिकों के यौन पुनर्वास के लिए ये थैरेपी खुद सरकार ही अपने खर्च पर दे रही है. यह एक कपल थैरेपी है, जिसमें घायल की मदद के लिए सरोगेट महिला या पुरुष पार्टनर मुहैया कराए जाते हैं, जो धीरे-धीरे अपने साथी का खोया आत्मविश्वास लौटाते हैं.

इजरायल में इसे लेकर अपेक्षाकृत खुलापन है 
वैसे तो दुनिया के कई देशों में कईयों बार सेक्स सरोगेट थैरेपी की चर्चा हो चुकी है लेकिन ज्यादातर जगहों पर इसे वेश्यावृत्ति की तरह देखा जाता है. वहीं इजरायल में खुद सरकार अलग-अलग युद्धों में घायल और समाज के कटे हुए सैनिकों को ये इलाज देती है. यहां बता दें कि चारों ओर से अरब देशों से घिरा इजरायल एकमात्र यहूदी देश है और लगातार किसी न किसी आतंकी हमले का सामना करने या खुद ही आक्रामक कार्रवाई में व्यस्त रहता है.

कब होती है जरूरत
ऐसे में बहुतेरे सैनिक बुरी तरह से घायल हो जाते हैं. कई बार यौन संबंध बनाकर सामान्य जीवन में लौट पाने की उनकी मनःस्थिति नहीं रहती. इन्हीं हालातों में सेक्स सरोगेट थैरेपी आती है. इसमें घायल सैनिक के पास एक पार्टनर होता है जो उसे धीरे-धीरे करीबी संबंध बनाने की ओर ले जाता है. कई मामले ऐसे भी होते हैं, जिनमें व्हील चेयर पर बैठे सैनिक को थैरेपी दी जाती है.

कैसा होता है थैरेपी रूम 
इसके लिए सैनिक और उसका पार्टनर एक विशेष रूम में रखे जाते हैं. ये रूम किसी होटल के कमरे से अलग होता है और इस तरह से डिजाइन होता है कि घर जैसा माहौल लगे. ऐसा इसलिए है कि सैनिक कंफर्टेबल हो सके और उसके मन में कोई नैतिक आशंका न आए. कमरे के साथ ही बाथरूम भी जुड़ा होता है. साथ ही दीवारों पर तस्वीरें सजी होती है.

ये बातें होती हैं शामिल
थैरेपी में बड़ा हिस्सा इस बात पर ध्यान देता है कि सैनिक अपने डर को छोड़कर साथी के साथ रिश्ता जोड़ने को बड़े. इसके तहत स्पर्श, अंतरंग बातचीत के तौर-तरीके बताए जाते हैं. ये सारी बातें उस पॉइन्ट पर खत्म होती हैं, जहां समझ आ जाए कि सैनिक संबंध बनाने के लिए मानसिक तौर पर पूरी तरह से तैयार हो चुका है.

बीबीसी की एक रिपोर्ट में विस्तार से इस पुनर्वास के बारे में बताया गया है. जैसे मान लें कि कोई सैनिक शादीशुदा है. युद्ध में घायल होने के बाद से वो अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने में सहज नहीं और दोनों ही किसी प्रोफेशनल थैरेपिस्ट के पास भी नहीं जाना चाहते. तब सरकार की ओर से उन्हें ये थैरेपी दिलाई जाती है.

सेक्सुअल रिहैबिलिटेशन पर जोर
थैरेपी शुरू होने से पहले सैनिक और उससे जुड़ने जा रहे सेक्स सरोगेट पार्टनर को एक एक्सपर्ट से निर्देश मिलते हैं. आमतौर पर ये कोई सेक्सुअल रिहैबिलिटेशन का जानकार होता है, जो बताता है कि सैनिक की क्या जरूरत है और उसके पार्टनर को किस तरह से मदद करनी चाहिए.

कंप्लीट सेशन का खर्च कितना होता है 
सेशन के बाद फीडबैक भी दिए जाते हैं ताकि आने वाले समय में इस थैरेपी को और बेहतर ढंग से सैनिकों के यौन पुनर्वास के लिए शुरू किया जा सके. इजरायल का रक्षा मंत्रालय जैसे पुनर्वास के दूसरे हिस्सों का खर्चा उठाता है वैसे इसका भी खर्च कवर करता है. कई सैनिकों के लिए ये सेशन कई महीनों तक चलते हैं. आमतौर ये तीन महीनों का रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम होता है, जिसका खर्च लगभग 4 लाख रुपए है.

इसराइली सेक्स थेरेपिस्ट रोनित अलोनी सेक्स सरोगेट थैरेपी पर खूब काम कर रही हैं. वे बीबीसी से अपने एक इंटरव्यू में इस बारे में बात करती हैं. फिलहाल तेल अवीव में दफ्तर बनाकर काम कर रही अलोनी को न्यूयॉर्क में पढ़ाई के दौरान इस थैरेपी के बारे में जानकारी मिली. लौटकर अपने देश यानी इजरायल आकर उन्होंने सैनिकों के पुनर्वास के लिए इसकी चर्चा धार्मिक नेताओं से की. तब नियम बना कि थैरेपी में कोई भी विवाहित व्यक्ति सेक्स पार्टनर के तौर पर शामिल नहीं किया जाएगा. ये नियम अब तक चला आ रहा है.

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