BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |

कब है बुद्ध पूर्णिमा? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

कब है बुद्ध पूर्णिमा? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
Share

बौद्ध धर्म ग्रन्थों के अनुसार वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को गौतम बुद्ध के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. क्योंकि मान्यता है कि इसी तिथि को महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था. अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से हर साल वैशाख की पूर्णिमा को पड़ने वाली तारीख तो अलग -अलग हो सकती है, लेकिन हिंदू पंचांग के हिसाब से वैशाख की पूर्णिमा को ही बुद्ध का जन्मोत्सव मनाया जाता है. वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा, हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म दोनों में बहुत ही श्रद्धा भाव से मनाया जाता है. इस बार बुद्ध पूर्णिमा 16 मई को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान बुद्ध के अलावा भगवान विष्णु और भगवान चंद्रदेव की भी पूजा की जाती है. संयोग से इस बार बुद्ध पूर्णिमा को चन्द्रग्रहण भी लग रहा है. इससे इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है.

कब मनाई जाएगी बुद्ध पूर्णिमा

साल 2022 में 16 मई दिन सोमवार को वैशाख की पूर्णिमा पड़ रही है, इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म उत्सव मनाया जाएगा. इसलिए इससे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. बुद्ध पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 15 मई को 12:45 से शुरू होकर 16 मई को 9:45 तक रहेगा. मान्यता है कि चंद्र दर्शन के पूर्णिमा का व्रत पूरा नहीं होता. इस दिन चंद्र दर्शन करने से चंद्रदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

बुद्ध पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व नेपाल के लुंबिनी नामक का स्थान पर हुआ था. सांसारिक जीवन से विरक्त होकर उन्होंने गया में बोधि वृक्ष के नीचे 49 दिन तक लगातार तपस्या की थी. 49वें दिन ज्ञान प्राप्त होने के कारण बोधिसत्व कहलाए.

ज्ञान प्राप्त होने के बाद उन्होंने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ के मृगदाव में दिया था. इनके प्रथम 5 शिष्य कौंडच, वस्प, भददोदि, महानाग और अरसजि थे. इसे धर्म चक्र प्रवर्तन के नाम से भी जाना जाता है.

भगवान बुद्ध ने लोगों को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी, इसी कारण भगवान बुद्ध का जन्मोत्सव केवल भारत में नहीं अपितु पूरे संसार में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. 


Share

Leave a Reply