BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |    Ration Card के बदले रोजगार सहायक की Dirty Deal, बोला- ‘पहले मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाओ फिर मिलेगा राशन कार्ड    |    छत्तीसगढ़ में तेजी से पांव पसार रहा कोरोना, रायपुर में सबसे ज्यादा केस, राज्य में कुल 45 एक्टिव केस    |

छत्तीसगढ़ में बिजली विभाग को जंगली हाथियों ने लगाया 1674 करोड़ का करंट, जाने पूरी खबर

छत्तीसगढ़ में बिजली विभाग को जंगली हाथियों ने लगाया 1674 करोड़ का करंट, जाने पूरी खबर
Share

त्तीसगढ़ में जंगल से गुजरे बिजली तारों की चपेट में आने से 18 वर्ष में 44 हाथियों की मौत हो चुकी है। इसे देखते हुए राज्य की बिजली वितरण कंपनी को वन क्षेत्रों में स्थित बिजली तारों को ऊंचा करने और इंसुलेटर वाले एरियल बंच (एबी) केबल लगाने का निर्देश हुआ है। इस पर करीब 1,674 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बिजली कंपनी यह राशि वन विभाग से वसूलने की कोशिश में थी, लेकिन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों का हवाला देते हुए कंपनी को अपने बजट से यह काम करने का निर्देश दिया है।इस पूरे मामले की शुरुआत जनवरी 2018 में हाई कोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका से हुई। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने दायर की थी। सिंघवी ने बताया कि सुनवाई के दौरान बिजली कंपनी की तरफ से कोर्ट में बताया गया था कि कंपनी तारों को ऊंचा करने समेत अन्य उपाय कर रही है।

इसके आधार पर कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया। साथ ही कहा कि निराकरण का यह मतलब नहीं है कि बिजली कंपनी चिरनिंद्रा में चली जाए। कोर्ट ने बिजली तारों की ऊंचाई बढ़ाने समेत अन्य उपाय करने का निर्देश दिया था। बिजली कंपनी ने इस पर होने वाले 1,674 करोड़ रुपये के खर्च की भरपाई वन विभाग से मांगते हुए डिमांड नोट (मांग पत्र) जारी कर दिया।

1,674 करोड़ के भारी-भरकम डिमांड नोट से वन विभाग हिल गया, चूंकि राज्य के वन विभाग का बजट इतना नहीं है। इस वजह से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मदद मांगी गई। इस पर मंत्रालय ने बजट देने से मना कर दिया। लेकिन कहा कि यह काम बिजली कंपनी को अपने बजट से करना होगा। मंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी के ऐसे प्रकरणों में जारी निर्देश का हवाला देते हुए खर्च बिजली कंपनी को वहन करने का निर्देश दिया है।

बिजली कंपनी को करीब 47 सौ किलोमीटर बिजली लाइन की ऊंचाई बढ़ाने के साथ ही एबी केबल लगाना पड़ेगा। इसमें 810 किलोमीटर 33 केवी लाइन और 3976 किलोमीटर एलटी लाइन शामिल है।


Share

Leave a Reply