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5 हजार की रिश्वत लेते महिला-बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर गिरफ्तार, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

5 हजार की रिश्वत लेते महिला-बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर गिरफ्तार, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई
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 खंडवा : मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की खलवा ब्लॉक में महिला एवं बाल विकास विभाग में पर्यवेक्षक अजीला मोहे को 5 हजार की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथ पकड़ा है। खालवा विकास खंड, भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से हर महीने अवैध वसूली यहां कोई गुप्त बात नहीं, बल्कि लिखा-पढ़ा नियम बन गई है। नियुक्ति चाहिए तो पैसे दो, पदस्थापना चाहिए तो पैसे दो, आगे बढ़ना है तो नकद थैली खोलो—यही इस विभाग का काला सच है। 26 फरवरी 2026 को लोकायुक्त संगठन की इंदौर इकाई ने इस गंदगी की एक परत उधेड़ी। संविदा पर्यवेक्षक अजिला मोहे को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। यह कार्रवाई नहीं, बल्कि भ्रष्ट तंत्र के चेहरे पर पड़ा तमाचा है।

“रेट कार्ड” से चलता विभाग

आवेदिका सलिता पालवी, आंगनवाड़ी सहायिका, से पहले 5,000 रुपये वसूले गए—ताकि सहायिका की नियुक्ति हो सके। इसके बाद जब आंगनवाड़ी केंद्र-3 में कार्यकर्ता पद रिक्त हुआ, तो उसी कुर्सी के बदले 2,00,000 रुपये की मांग कर दी गई। कुल 2,05,000 रुपये—यह रिश्वत नहीं, लूट है। यह बताता है कि यहां फाइल नहीं, कैश चलता है; नियम नहीं, दलाली चलती है।

ट्रैप में पकड़ी गई, सिस्टम बेनकाब

शिकायत सत्य पाई गई। ट्रैप दल ने कार्रवाई की। पैसे लेते वक्त आरोपी पकड़ी गई। भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत केस दर्ज है। लेकिन सवाल यह नहीं कि एक आरोपी पकड़ी गई—सवाल यह है कि यह धंधा कितनों की शह पर चल रहा था?

यह एक व्यक्ति नहीं, पूरा नेटवर्क है

यह घटना साबित करती है कि: आंगनवाड़ी केंद्र कमाई के काउंटर बना दिए गए हैं। गरीब महिलाओं की नौकरी नीलामी पर है। संविदा पदों का इस्तेमाल खुली उगाही के लिए किया जा रहा है। अब आधे-अधूरे एक्शन से काम नहीं चलेगा

अगर सरकार और प्रशासन सचमुच ईमानदार है तो:

पूरे प्रोजेक्ट/सेक्टर में समग्र जांच हो, पिछली नियुक्तियों-पदस्थापनाओं का फोरेंसिक ऑडिट किया जाए, अवैध वसूली के हर हिस्सेदार—ऊपर से नीचे तक—पर कठोरतम कार्रवाई हो और पीड़ित कर्मचारियों को संरक्षण दिया जाए, ताकि वे सच बोल सकें।

एक गिरफ्तारी से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होता।

जब तक पूरे गिरोह को बेनकाब कर सलाखों के पीछे नहीं डाला जाएगा, तब तक महिला-बाल विकास विभाग में सेवा नहीं, सिर्फ सौदेबाजी चलती रहेगी।


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