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विश्व स्तरीय आदिवासी समुदाय का मेला 5 फरवरी से, जाने पूरी खबर...

विश्व स्तरीय आदिवासी समुदाय का मेला 5 फरवरी से, जाने पूरी खबर...
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सुकमा। विश्व के सबसे बड़े आदिवासी समुदाय के श्रद्धालूओं का मेला होने का गौरव जिले से 120 किमी दूर तेलंगाना के मेड़ारम में 05 से 08 फरवरी तक आयोजित सुनिश्चित है। इस मेले में छत्तीसगढ़ सहित 04 राज्यों के एक करोड़ से अधिक आदिवासी श्रद्धालु शामिल होने की संभावना प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी है। मेले की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। मेले के लिए नदी तट के आसपास 10 किमी के दायरे में अस्थाई गांव बनाया जा रहा है। इस इलाके में जंपनावागू नदी को श्रद्धालू पवित्र नदी मानते हैं। इसके तट पर सामक्का व समलक्का माता का मंदिर है। जिसकी पूजा अर्चना व इन्हें गुड़ का भोग चढ़ाने की पंरपरा का निर्वहान किया जायेगा। गुड़ को सोने का प्रतिक मानकर चढ़ाया जाता है। मंदिर में कई सौ च्ंिटल गुड़ का अर्पण किया जाता है। 


तेलंगाना सरकार के द्वारा मेले के आयोजन के लिए सौ करोड रुपए बजट का प्रावधान किया हुआ है। कोंटा से भद्राचलम होते हुए तेलंगाना के मनगुर होते मेड़ारम पहुंचा जा सकता है, जिसकी दूरी 120 किमी पड़ती है। इसके अलावा बीजापुर से तारलागुड़ा एडुरनागाराम होते मेड़ाराम जा सकते हैं। यह दूरी बीजापुर से 130 किमी है। छत्तीसगढ़ सहित अन्य 04 राज्यों से श्रद्धालु यहां प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी बड़ी संख्या में आदिवासी श्रद्धालूओं के यहां पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालूओं के लिए यह तक पहुंचने के लिए 04 हजार से अधिक यात्री बसों की व्यवस्था की जा रही है। कनेक्टिविटी के लिए मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं। स्वच्छता के लिए 18 हजार से अधिक शौचालय बनाए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से सिर्फ ग्रे हाउंड के ही 15 सौ जवान तैनात रहेंगे। पेयजल के लिए पाइप लाइन व भोजन के लिए होटल- दुकानें लगनी शुरु हो गइ हैं। मान्यता के अनुसार यहां समक्का व सारलम्म्मा देवी को गुड़ का चढ़ावा दिया जाता है। इसके चलते कई सौ च्ंिटल गुड़ यहां प्रसाद के तौर पर चढ़ावा चढ़ता है। गुड़ को सोने का प्रतिरुप माना जाता है। मंदिर पहुंचने के पहले श्रद्धालु पवित्र नदी में स्नान करते हैं उसके बाद माता के दर्शन करते हैं

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