12 साल की बच्ची ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, बताया अपने सबसे बुरे सपने के बारे में
नई दिल्ली। कोरोना महामारी से पूरी दुनिया में जीवन को लेकर जो डर पैदा हुआ है उससे बच्चे भी नहीं बच पाएं हैं। हालांकि बच्चों के इन चिंताओं को जाहिर करने पर उनके माता-पिता उन्हें संभाल लेते है लेकिन एक ऐसी बच्ची भी है जिसे इस डर को नहीं जीना है इसलिए वो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने इस डर और मौजूदा हालातों को बेहतर करने के लिए एक पत्र लिख देती हैं।
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हम बात कर रहे हैं, 12 साल की रिधिमा पांडे की, जो उत्तराखंड की रहने वाली हैं और एक जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता भी हैं। रिधिमा ने पीएम मोदी को 2 पन्नों की हाथ से लिखी एक चिट्ठी भेजी है। जिसमें रिधिमा ने अपने अब तक के सबसे बुरे सपने के बारे में लिखा है।
रिधिमा ने पत्र में लिखा है कि उन्होंने सपना देखा कि वो ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ स्कूल जा रही हैं। उन्होंने पीएम ने अनुरोध किया कि वो इस स्थिति को बेहतर बना सकते हैं और वो ये तय कर सकते हैं कि ऑक्सीजन सिलेंडर कभी भी बच्चों के जीवन का हिस्सा न बने। वो ये तय करें कि बच्चे आने वाले समय में सिलेंडर अपने कंधो पर उठा कर स्कूल न ले जाएं बल्कि उनके कंधों पर स्कूल का बस्ता ही हो।
रिधिमा ने ये भी कहा कि वो पत्र लिखने के लिए मजबूर हो गईं थीं क्योंकि कोरोना बीमारी के आने के बाद से लॉकडाउन हुआ और मानव गतिविधियां कम हो गईं जिससे हमारे आसपास का प्रदूषण कम हुआ और आसमान साफ़ और नीला दिखाई देने लगा।
उन्होंने ये भी लिखा कि संयुक्त राष्ट्र ने 7 सितंबर को इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फार ब्लू स्काइज घोषित किया गया और ये पहली बार था जब पूरा विश्व इसे मना रहा था। मेरे इस पत्र का मकसद सभी स्तर की जनता को जागरूक करना है। सभी को ये बताना है कि साफ हवा का होना और स्वास्थ्य पर्यावरण हमारे लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए भी मैंने 7 सितंबर को चुना है।
रिधिमा कहती हैं कि मुझे उम्मीद है कि पीएम मोदी को मेरा ये पत्र मिलेगा और वो इसका जवाब भी देंगे। मेरा पत्र प्राप्त होगा और वह जवाब देंगे। मैंने डाक से पीएम को पत्र भेजा है।







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