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भारत ने चीन को फिर दिया बड़ा झटका: इस बार 15 अगस्त पर नहीं बिकेगा चीनी मांझा

 भारत ने चीन को फिर दिया बड़ा झटका: इस बार 15 अगस्त पर नहीं बिकेगा चीनी मांझा
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नईदिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभर में पतंगबाजी का चलन है. इस वजह से देश में पतंग और मांझे का करोड़ों में सालाना कारोबार होता है. इस बार भारत और चीन के बीच तनाव को दिल्ली समेत देशभर के व्यापारी चीनी मांझे का बहिष्कार कर रहे हैं. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के मुताबिक इस बाच चीनी मांझा पूरे भारत में नहीं बिकेगा. हालांकि, दिल्ली में चीनी मांझा साल 2017 से बैन है. इस बार बाजार में चीनी मांझे पर दिल्ली पुलिस भी अपनी कड़ी नजर रखे हुए है|

वहीं, कोरोना महामारी की वजह से इस बार पतंगें बेचने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उनकी बिक्री में गिरावट हुई है. इस साल दिल्ली और देश के व्यापारियों ने चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के कैट के अभियान के तहत भारतीय सामान अपनाने पर तेजी से अमल करना शुरू कर दिया है. उनके मुताबिक देश में चीन से लगभग 500 करोड़ रुपये का मांझा हर साल आता है जो इस बार आयात नहीं हुआ|

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि इस बार देश के व्यापारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाते हुए दिल्ली के व्यापारी भी पतंगबाजी के लिए चीनी मांझा नहीं बेचेंगे और उसकी जगह भारतीय मांझा और सद्दी ही बेची जाएगी. उनके मुताबिक देश में बरेली, मुरादाबाद का मांझा चीन के मांझे के मुकाबले ज्यादा बेहतर है और इस साल से हर बार देश में बना मांझा ही इस्तेमाल होगा. उन्होंने कहा कि एक मोटे अनुमान के अनुसार दिल्ली में प्रति वर्ष लगभग 100 करोड़ रुपये के मांझे की बिक्री 15 अगस्त और रक्षा बंधन के आस पास होती है जिसमें से लगभग 80 करोड़ रुपये का मांझा पिछले सालों में चीन से दिल्ली आता था जिसकी उत्तर भारत के राज्यों में बिक्री होती थी लेकिन इस बार चीनी मांझा बाजार में नहीं है|

खंडेलवाल के मुताबिक वास्तव में पतंगबाजी भारत में सदियों से चली आ रही है और यह एक तरह से भारत का ही खेल है. उन्होंने कहा कि चीन भारत के हर त्योहार पर इस्तेमाल होने वाले हर सामान पर अपना कब्जा कर भारतीय बाजार में अपनी पैठ बनाने की नीति पर एक लंबे समय से काम कर रहा है, उसी सिलसिले में मांझे पर भी उसने पिछले सालों से अपना एकाधिकार बनाने की कोशिश की थी|

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