एफआईआर की कॉपी 24 घंटे में मुहैया करवाने वाली जनहित याचिका को सुको ने किया खारिज
नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के पुलिस महानिदेशक और संबंधित गृह सचिवों को दिशानिर्देश जारी करने की उस मांग को खारिज कर दिया है जिसमें 24 घंटे के भीतर अभियुक्तों को एफआईआर की प्रमाणित कॉपी मुहैया करवाने के लिए एक मेकैनिज्म तैयार करने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक गोयनका की उस याचिका पर विचार करने से मना कर दिया जिसमें कहा गया था कि मौजूदा महामारी की स्थिति के कारण एफआईआर की उपलब्धता की समस्या को बहुत महत्व मिलता है, क्योंकि न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट बंद हो गई है. जो आरोपी व्यक्तियों को अपने कानूनी उपाय को छोडऩे के लिए मजबूर करती है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है|
हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पहले से ही इस मुद्दे पर कोर्ट द्वारा पर्याप्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं. इस मामले में दलीलों में सवाल उठाया गया था कि यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया में बनाम भारत संघ (2016) 9 एससीसी 473 मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुलिस / क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट को एफआईआर की प्रमाणित कॉपी मुहैया करवाने के संबंध में दिए गए निर्देश पर वर्तमान महामारी की स्थिति को देखते हुए फिर से विचार करने की आवश्यकता है. सामान्य परिस्थितियों में कोई भी इसे मजिस्ट्रेट के कोर्ट से ही प्राप्त कर सकता है. न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट को बंद करने से एफआईआर की कॉपी के लिए पुलिस की दया पर आरोपी व्यक्तियों को छोड़ दिया गया है. एफआईआर की कॉपी उपलब्ध नहीं होने से ऐसे व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है|
कोर्ट में दलील देते हुए यह भी कहा गया कि भले ही कोविड-19 महामारी से प्रभावी ढंग से लडऩे के प्रयास किए गए हैं, लेकिन ये दिशा निर्देश इस तरह के आरोपी व्यक्तियों के प्रति उदासीनता को लेकर पूरी तरह से मौन है जो वर्तमान महामारी की स्थिति में शिकायत की एक कॉपी के साथ-साथ एफआईआर की एक कॉपी प्राप्त करने में जूझ रहे हैं. याचिका में यह भी कहा गया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, केंद्र सरकार राज्य सरकार को अनिवार्य निर्देश जारी कर सकती है. साथ ही याचिका में राज्यों के पुलिस महानिदेशक और गृह सचिवों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से एफआईआर की कॉपी के लिए आवेदन स्वीकार किए जाने के आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी|







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