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पूरे देश के लिए आदेश मान्य नहीं हो सकता, स्कूल फीस संबंधी याचिका पर सुको का निर्देश

पूरे देश के लिए आदेश मान्य नहीं हो सकता, स्कूल फीस संबंधी याचिका पर सुको का निर्देश
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नईदिल्ली। कोरोना संकट के कारण देश में लगाए गए लॉकडाउन के दौरान स्कूलों से फीस लेने से मना करने संबंधी मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों की ओर से बच्चों से सिर्फ ट्यूशन फीस लेने संबंधी आदेश पारित करने पर संदेह व्यक्त किया. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई पर कहा कि पूरे देश के लिए एक समान आदेश पारित नहीं किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस संबंध में हाईकोर्ट जाने को कहा है.

 

बता दें कि पिछले काफी दिनों से अभिभावक मांग कर रहे हैं कि स्कूलों को लॉकडाउन के दौरान की फीस लेने से रोका जाए. अभिभावकों की ओर से कहा गया था कि बिना कोई सेवा दिए स्कूलों द्वारा फीस और अन्य खर्चों की मांग करना अवैध है. स्कूल के एडमिशन फॉर्म में कोई फोर्स मेजर क्लॉज नहीं है. स्कूल एडमिशन फार्म के नियमों और शर्तों को मानने को बाध्य हैं.

वहीं गुजरात सरकार ने राज्य के स्व-वित्तपोषित स्कूलों को निर्देश दिया है कि कोविड-19 की वजह से जब तक वे बंद हैं, तब तक छात्रों से ट्यूशन फीस न लें. सरकार ने स्कूलों को 2020-21 शैक्षणिक सत्र के लिए फीस न बढ़ाने का भी निर्देश दिया. राज्य शिक्षा विभाग द्वारा 16 जुलाई को जारी अधिसूचना बुधवार को सार्वजनिक हुई. इसमें कहा गया है कि कोई भी स्कूल फीस जमा न होने पर इस अवधि में पहली से कक्षा से लकर आठवीं कक्षा तक के किसी भी छात्र को निष्कासित नहीं करेगा क्योंकि ऐसा करना शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा-16 का उल्लंघन होगा.

सरकार ने अधिसूचना में कहा कि इसके अलावा गुजरात उच्च न्यायालय के अनुसार 30 जून तक फीस जमा न करने वाले किसी भी छात्र को निष्कासित नहीं किया जाएगा. विभाग ने कहा कि अनेक स्कूलों ने लॉकडाउन की अवधि के दौरान अपने शिक्षण या गैर-शिक्षण स्टाफ को कोई वेतन नहीं दिया है या केवल 40-50 प्रतिशत वेतन दिया है.

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