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बीयर का शौक रखने वालो के लिए है बुरी खबर...

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नई दिल्ली : बीयर जौ और अंगूर को सड़ा कर तैयार की जाती है. आमतौर पर लोग इसे सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. गर्मियों के मौसम बीयर कंपनियों के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि इन्हीं महीनों में उनकी बिक्री सबसे ज्यादा होती है। भारत में अब गर्मी का मौसम शुरू होने वाला है, लेकिन बीयर कंपनियां इस बार खुश नहीं हैं। धंधे का सीजन शुरू होने की खुशी पर रूस-यूक्रेन का संकट भारी पड़ रहा है और बीयर कंपनियों को तनाव दे रहा है।


भारत में मार्च से जुलाई के दौरान ही 40 से 45 फीसदी बीयर की बिक्री होती है। बीयर कंपनियों का अनुमान था कि लगातार 2 सीजन खराब होने के बाद इस साल उनकी बिक्री सालाना आधार पर 40 फीसदी बढ़ सकती है। रेस्तरां, बार और क्लब आदि कोरोना महामारी से जुड़ी पाबंदियों के चलते पिछली दोनों गर्मियों में बंद पड़े रहे। बीयर की ज्यादातर बिक्री यहीं होती है। साल 2020 मे तो जब पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था, कई Brewers को हजारों लीटर बीयर नालियों में बहाने पर मजबूर होना पड़ा था।


रूस और यूक्रेन दोनों ही देश गेहूं , जौ जैसी फसलों के सबसे बड़े उत्पादकों में से हैं। गेहूं के मामले में रूस दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है तो यूक्रेन चौथे स्थान पर है। दोनों देश मिलकर गेहूं के टोटल ग्लोबल एक्सपोर्ट में 25 फीसदी का हिस्सा रखते हैं। इसी तरह जौ के मामले में भी दोनों देश टॉप5 एक्सपोर्टर्स में से हैं। बीयर बनाने में सबसे ज्यादा जौ का इस्तेमाल होता है। इसके बाद गेहूं का भी बीयर बनाने में ठीक-ठाक इस्तेमाल होता है। रूस और यूक्रेन के तनाव के चलते जौ-गेहूं की वैश्विक आपूर्ति में बाधा न आ जाए, बीयर कंपनियों को यही आशंका खाए जा रही है।


ईटी की एक रिपोर्ट में प्रीमियम बीयर ब्रांड Bira91 के चीफ एक्सीक्यूटिव अंकुर जैन के हवाले से बताया गया है कि रूस-यूक्रेन संकट बीयर इंडस्ट्री के मार्जिन को कम कर सकता है। वह कहते हैं, ‘जौ की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं। शॉर्ट एंड मीडियम टर्म में निश्चित तौर पर जौ की वैश्विक कीमतों पर यूक्रेन का असर होने वाला है। अभी यह देखा जाना बाकी है कि इस असर को कम करने के लिए बीयर कंपनियां तुरंत रिएक्ट करती हैं और दाम बढ़ाने का निर्णय करती हैं या नहीं। कुछ मामलों में तो दाम सरकार के नियंत्रण में है।’
 


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