प्रदेश के 7 डिप्टी कलेक्टरों को मिला आईएएस अवार्ड
रायपुर। राज्य के 7 डिप्टी कलेक्टरों को आईएएस अवार्ड मिला है। जिसके बाद डीपीसी के बाद प्रोसेडिंग के लिए राज्य सरकार की रजामंदी मिलते ही आदेश जारी किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि प्रक्रिया पूरी होते ही औपचारिक रूप से सभी 7 डिप्टी कलेक्टर आईएएस अवार्ड हो जायेंगे।
हालांकि इस बार भी तीन सीनियर डिप्टी कलेक्टरों का मामला अटक गया है। बता दें कि जिन सात आईएएस अधिकारियों के नाम चयनित किए गए हैं, उनमें जयश्री जैन, प्रियंका महोबिया, डॉ.फरिहा आलम, दीपक कुमार अग्रवाल, तुलिका प्रजापति, चंदन त्रिपाठी और रोक्तिमा यादव के नाम शामिल है।
यह सभी अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा के 2005 बैच के अधिकारी हैं। दो दिन पहले ही इऩ सभी अफसरों की डीपीसी हुई थी, जिसके बाद अब प्रोसेडिंग पर राज्य सरकार की सहमति मांगी गयी है। जल्द ही सभी अफसरों के आईएएस अवार्ड का औपचारिक आदेश जारी हो जायेगा।
दरअसल इस बार प्रमोशन से बनने वाले आईएएस के सात पदों के लिए 21 डिप्टी कलेक्टरों के नाम भारत सरकार को भेजे गए थे। जिनमें से तीन नाम सीनियर अफसरों के थे। अरबिंद एक्का 99 बैच, संतोष देवांगन 2000 और हीना नेताम 2002 बैच। गोपनीय चरित्रावली के चक्कर में इन तीनों अधिकारियों का नाम कट गया। आईएएस अवार्ड के लिए सभी सीआर क होना चाहिए। लेकिन, तीनों के कई बार सीआर ख मिला है।
बताया जा रहा है कि पीएससी के चर्चित 2003 बैच के नाम थे। इसको लेकर लोगों में सबसे अधिक कौतूहल थी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इनकी नियुक्ति निरस्त कर दी थी और वे सुप्रीम कोर्ट के स्टे पर चल रहे हैं।
पीएससी में डिप्टी कलेक्टर बनने से चुकी वर्षा डोंगरे ने डीओपीटी और यूपीएससी में जाकर फरियाद की थी कि इन्हें आईएएस न अवार्ड किया जाए। लेकिन, छत्तीसगढ़ से गए अफसरों ने डीपीसी में तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिला हुआ है। स्टे में प्रमोशन नहीं रोका जा सकता। इसके बाद इस शर्त पर डीपीसी ने पीएससी 2003 बैच के सात डिप्टी कलेक्टरों को आईएएस अवार्ड करने हरी झंडी दे दी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसला अगर प्रतिकुल आया तो सभी को अपना पद छोड़ना होगा।




